उत्तर प्रदेश के शिक्षकों ने डिजिटल जनगणना में निजी स्मार्टफोन के उपयोग पर उठाए सवाल
डिजिटल जनगणना में निजी मोबाइल के उपयोग पर यूपी के शिक्षकों में नाराजगी, सरकार से की स्मार्टफोन देने की मांग
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Image: Jagran
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ (पांडेय गुट) ने डिजिटल जनगणना में निजी स्मार्टफोन के उपयोग पर नाराजगी जताई है। शिक्षकों का कहना है कि उन्हें अपने खर्च पर स्मार्टफोन खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है, जबकि अन्य कर्मचारियों को विभागीय स्मार्टफोन मिलते हैं।
- 01शिक्षकों को डिजिटल जनगणना में निजी स्मार्टफोन का उपयोग करने के लिए कहा गया है।
- 02अन्य विभागों के कर्मचारियों को स्मार्टफोन दिए जाते हैं, जबकि शिक्षकों को खुद खर्च करना पड़ता है।
- 03एचएलओ एप के लिए उच्च तकनीकी मानक आवश्यक हैं।
- 04संघ ने इसे आर्थिक और तकनीकी बोझ बताया है।
- 05शिक्षकों ने सरकार से स्मार्टफोन प्रदान करने की मांग की है।
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उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ (पांडेय गुट) ने डिजिटल जनगणना प्रक्रिया के दौरान शिक्षकों से निजी स्मार्टफोन के उपयोग पर असंतोष व्यक्त किया है। संघ के नेताओं, डॉ. जितेंद्र सिंह पटेल, ओम प्रकाश त्रिपाठी और आशीष सिंह का कहना है कि 'ब्रिंग योर ओन डिवाइस' (BYOD) मॉडल के तहत शिक्षकों को अपने स्मार्टफोन का उपयोग करने के लिए कहा गया है, जबकि अन्य विभागों के कर्मचारी जैसे लेखपाल, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और एएनएम को विभागीय स्मार्टफोन मिलते हैं। शिक्षकों को एचएलओ एप के लिए न्यूनतम Android 12 या उससे ऊपर और कम से कम 4 जीबी रैम वाले फोन की आवश्यकता होती है, जबकि आईफोन के लिए iOS 15 अनिवार्य है। इससे कई शिक्षक नए फोन खरीदने के लिए मजबूर हो रहे हैं। संघ ने इसे शिक्षकों पर आर्थिक और तकनीकी बोझ बताते हुए असमानता का मुद्दा उठाया है और सरकार से स्मार्टफोन प्रदान करने की मांग की है।
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यह निर्णय शिक्षकों के लिए आर्थिक बोझ बढ़ा रहा है, जिससे उनकी वित्तीय स्थिति प्रभावित हो सकती है।
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