सरगुजा में बुजुर्ग मां के लिए बहू ने 9 किमी की कठिन यात्रा की
सरकारी योजनाओं की खुली पोल, ₹1500 के लिए सास को कंधे पर उठाकर 9 किमी चली बहू
Image: Globalherald
छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में सुखमुनिया नाम की महिला ने अपनी बुजुर्ग सास को कंधे पर उठाकर 9 किलोमीटर चलकर ₹1500 की पेंशन प्राप्त करने के लिए संघर्ष किया। यह घटना सरकारी योजनाओं की वास्तविकता पर सवाल उठाती है, जहां लाभार्थियों को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।
- 01सुखमुनिया को अपनी सास की पेंशन के लिए हर महीने 9 किमी चलना पड़ता है।
- 02सरकारी योजनाओं में बदलाव के कारण पेंशन अब सीधे घर नहीं पहुंचती।
- 03पहले पेंशन राशि सीधे गांव में वितरित की जाती थी, लेकिन अब लाभार्थियों को बैंक या केंद्र तक आना पड़ता है।
- 04सुखमुनिया की यात्रा में उसे नदियों और पथरीले रास्तों को पार करना पड़ा।
- 05स्थानीय प्रशासन ने इस समस्या का समाधान करने के लिए कोई कदम नहीं उठाया।
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छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के कुनिया गांव की निवासी सुखमुनिया ने अपनी बुजुर्ग सास को कंधे पर उठाकर 9 किलोमीटर की दूरी तय की, ताकि वह अपनी ₹1500 की सामाजिक सुरक्षा पेंशन प्राप्त कर सके। यह घटना सरकारी योजनाओं के दावों की वास्तविकता को उजागर करती है, जहां लाभार्थियों को असुविधाओं का सामना करना पड़ता है। सुखमुनिया को हर महीने अपनी सास की बायोमेट्रिक सत्यापन के लिए इसी तरह की कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है। पहले पेंशन राशि सीधे उनके गांव में वितरित की जाती थी, लेकिन अब नियमों में बदलाव के कारण उन्हें खुद बैंक या मुख्य केंद्र तक आना पड़ता है। इस कठिन यात्रा में सुखमुनिया ने नदियों और पथरीले रास्तों को पार किया, जो उसकी स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है। स्थानीय प्रशासन की बेरुखी और अधिकारियों की अनदेखी ने इस परिवार की पीड़ा को और बढ़ा दिया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि सरकारी दावों और वास्तविकता में बड़ा अंतर है।
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यह घटना दर्शाती है कि गरीब परिवारों को अपने हक की राशि पाने के लिए कितनी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
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