बंगाल सरकार ने डीसी शांतनु सिन्हा बिस्वास की सेवा समाप्त की
ED की गिरफ्तारी के बाद बड़ा एक्शन, बंगाल सरकार ने डीसी शांतनु सिन्हा बिस्वास की सेवा की खत्म
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Image: Jagran
बंगाल सरकार ने कोलकाता पुलिस के डिप्टी कमिश्नर शांतनु सिन्हा बिस्वास की सेवाएं समाप्त कर दी हैं, जिनकी गिरफ्तारी ईडी द्वारा मनी लांड्रिंग और जमीन से जुड़े मामलों में की गई थी। अन्य 12 पुलिसकर्मी भी जांच के दायरे में हैं, जो विवादित संपत्तियों पर कब्जा करने के आरोप में शामिल हैं।
- 01शांतनु सिन्हा बिस्वास को ममता बनर्जी की सरकार ने दो साल का सेवा विस्तार दिया था, लेकिन उन्हें इस्तीफा देने का अवसर नहीं दिया गया।
- 02ईडी की कार्रवाई मनी लांड्रिंग और जमीन से जुड़े सिंडिकेट के मामलों में की गई थी।
- 03बिस्वजीत पोद्दार उर्फ सोना पप्पू, एक फरार हिस्ट्री-शीटर, इस मामले में शामिल है।
- 04सिन्हा बिस्वास के करीबी 12 अन्य पुलिसकर्मी भी ईडी की जांच के दायरे में हैं।
- 05गिरोह ने विवादित संपत्तियों पर कब्जा करने के लिए फर्जी एफआईआर दर्ज करवाई थीं।
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कोलकाता पुलिस के डिप्टी कमिश्नर शांतनु सिन्हा बिस्वास की सेवाएं बंगाल सरकार द्वारा समाप्त कर दी गई हैं, जिनकी गिरफ्तारी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मनी लांड्रिंग और जमीन से संबंधित मामलों में की थी। उन्हें ममता बनर्जी की सरकार ने दो साल का सेवा विस्तार दिया था, लेकिन उन्हें इस्तीफा देने का अवसर नहीं दिया गया। ईडी की जांच में बिस्वजीत पोद्दार उर्फ सोना पप्पू, एक कुख्यात हिस्ट्री-शीटर, का नाम भी शामिल है। आरोप है कि यह गिरोह कोलकाता और उसके आसपास विवादित जमीनों और संपत्तियों को कम कीमत पर कब्जाने का कार्य करता था, जिसे बाद में बड़े मुनाफे वाले रियल एस्टेट कारोबार में इस्तेमाल किया जाता था। ईडी की जांच के दायरे में अन्य 12 पुलिसकर्मी भी हैं, जिनमें ज्यादातर इंस्पेक्टर और सब-इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारी शामिल हैं। यह सभी पुलिसकर्मी सिन्हा बिस्वास के करीबी विश्वासपात्र थे और इन पर भी आरोप है कि इन्होंने विवादित संपत्तियों पर कब्जा करने में मदद की।
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यह कार्रवाई कोलकाता में पुलिस की छवि को प्रभावित कर सकती है और नागरिकों में सुरक्षा के प्रति चिंता बढ़ा सकती है।
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