प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने का आह्वान: आचार्य देवव्रत
बीमारियों से बचने का एकमात्र उपाय है प्राकृतिक खेती : आचार्य देवव्रत
Amar Ujala
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गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने कुरुक्षेत्र में प्राकृतिक खेती के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि रासायनिक खेती ने पर्यावरण को नुकसान पहुंचाया है और प्राकृतिक खेती ही बीमारियों से बचने का एकमात्र उपाय है।
- 01आचार्य देवव्रत ने प्राकृतिक खेती को जीवनदायिनी कृषि पद्धति बताया।
- 02रासायनिक खेती ने पर्यावरण और स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाया है।
- 03प्राकृतिक खेती से आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ वातावरण और पोष्टिक आहार मिलेगा।
- 04गुजरात में 8 लाख से अधिक किसान प्राकृतिक खेती कर रहे हैं।
- 05किसानों को प्राकृतिक खेती को मिशन के रूप में अपनाने की अपील की गई।
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गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने कुरुक्षेत्र में एक कार्यक्रम के दौरान प्राकृतिक खेती के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आर्य समाज ने हमेशा समाज में आपसी भाईचारे और कुरीतियों को दूर करने का कार्य किया है। रासायनिक खेती के दुष्प्रभावों का उल्लेख करते हुए, उन्होंने कहा कि यह न केवल पर्यावरण बल्कि मानव स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक है। आचार्य देवव्रत ने प्राकृतिक खेती को जीवनदायिनी कृषि पद्धति बताया, जो आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ वातावरण, पोष्टिक आहार और शुद्ध जल प्रदान करेगी। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे प्राकृतिक खेती को अपनाएं, जिससे गोमाता का संरक्षण और भूमिगत जल में सुधार होगा। वर्तमान में, गुजरात में आठ लाख से अधिक किसान प्राकृतिक खेती कर रहे हैं, और प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में लगभग 40 लाख किसान इस पद्धति से जुड़ चुके हैं।
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प्राकृतिक खेती अपनाने से किसानों को आर्थिक लाभ होगा और पर्यावरण की स्थिति में सुधार आएगा।
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