रुपये में गिरावट, कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि का असर
रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर फिसला, कच्चे तेल की उछाल और विदेशी निकासी से दबाव बढ़ा
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भारतीय रुपया बुधवार को 0.32% गिरकर 94.85 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ, जो कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और विदेशी पूंजी निकासी का परिणाम है। इस वर्ष अब तक रुपये में 5.24% की गिरावट आई है।
- 01रुपया 94.85 प्रति डॉलर के नए निचले स्तर पर बंद हुआ।
- 02कच्चे तेल की कीमतें बढ़कर 115 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गईं।
- 03इस वर्ष रुपये में 5.24% की गिरावट आई है।
- 04डॉलर की मजबूती और घरेलू नकदी की तंगी ने रुपये पर दबाव डाला।
- 05विश्लेषकों का अनुमान है कि रुपया 94.10 से 95.15 प्रति डॉलर के बीच कारोबार करेगा।
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बुधवार को भारतीय रुपया 0.32% गिरकर 94.85 प्रति डॉलर के नए निचले स्तर पर बंद हुआ। यह गिरावट कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि और विदेशी पूंजी के लगातार बाहर जाने के कारण हुई। ब्रेंट क्रूड की कीमतें लगभग 3% बढ़कर 115 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गईं, जिससे उभरते बाजारों की मुद्राओं पर दबाव पड़ा। इस वर्ष अब तक रुपये में 5.24% की गिरावट आई है। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के वरिष्ठ शोध विश्लेषक दिलीप परमार ने बताया कि भारतीय रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ, क्योंकि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और मजबूत होते अमेरिकी डॉलर ने इस मुद्रा पर दबाव डाला। घरेलू नकदी की तंगी और आयातकों की मांग भी रुपये की गिरावट में योगदान कर रही है। विश्लेषकों का अनुमान है कि रुपया 94.10 से 95.15 प्रति डॉलर के बीच सकारात्मक रुझान के साथ व्यापार करेगा।
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रुपये की गिरावट से आयात महंगा हो जाएगा, जिससे घरेलू उपभोक्ताओं पर महंगाई का दबाव बढ़ सकता है।
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