जर्मनी में अंडरग्रेजुएट शिक्षा के लिए 70% मार्क्स की नई शर्तें
Study in Germany: जर्मनी में UG का रास्ता आसान, 70% रूल लाया राहत, अब भारतीय छात्रों के लिए क्या जानना जरूरी?
Image: Nbt Navbharattimes
जर्मनी अब भारतीय छात्रों के लिए एक प्रमुख अध्ययन स्थल बन गया है। 2026/27 से अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम में प्रवेश के लिए छात्रों को 12वीं में कम से कम 70% अंक प्राप्त करने होंगे। यह बदलाव जर्मनी की शिक्षा प्रणाली में भारतीय योग्यताओं के मूल्यांकन के लिए लागू किया गया है।
- 01जर्मनी में बैचलर्स के लिए 70% अंक की शर्त लागू होगी, जो 2026/27 से प्रभावी है।
- 02दो प्रवेश मार्ग हैं: स्टुडियनकोलेग और डायरेक्ट एंट्री, दोनों में 70% अंक की आवश्यकता है।
- 03जर्मनी में ट्यूशन फीस नहीं होने के कारण यह भारतीय छात्रों के लिए आकर्षक है।
- 04डॉ. गगन स्याल ने जर्मनी में अध्ययन के लिए आवश्यकताओं की जानकारी दी है।
- 05एडमिशन के लिए APS सर्टिफिकेट और भाषा परीक्षा की जानकारी भी आवश्यक है।
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जर्मनी, जो भारतीय छात्रों के लिए एक लोकप्रिय अध्ययन स्थल बन चुका है, अब अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम में प्रवेश के लिए 70% अंक की नई शर्त लागू कर रहा है। यह नियम 2026/27 से प्रभावी होगा और छात्रों को जर्मनी के 'अनाबिन' डेटाबेस में भारतीय शैक्षणिक योग्यताओं के मूल्यांकन के तहत लागू किया गया है। जर्मनी में बैचलर्स की पढ़ाई के लिए दो मुख्य मार्ग हैं: स्टुडियनकोलेग और डायरेक्ट एंट्री, दोनों में 12वीं कक्षा में कम से कम 70% अंक होना अनिवार्य है। जर्मनी की शिक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता, रिसर्च के अवसर और कम ट्यूशन फीस के कारण भारतीय छात्र यहां अध्ययन करने के लिए बढ़ रहे हैं। इसके अलावा, छात्रों को APS सर्टिफिकेट और भाषा परीक्षा की जानकारी भी जुटानी होगी। जर्मनी में अध्ययन करने के लिए सही जानकारी और योजना बनाना महत्वपूर्ण है, जिससे छात्रों को बेहतर करियर और वैश्विक अवसर मिल सकें।
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इस नए नियम से भारतीय छात्रों को जर्मनी में अध्ययन के लिए अधिक प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा।
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