भारत में अल नीनो का खतरा: खेती और जल संकट पर गंभीर प्रभाव
खेती पर भी संकट ! सूख जाएगा भारत? अल नीनो पर अब तक डरावना अलर्ट, क्या है खतरे से निपटने का भारत का प्लान

Image: News 18 Hindi
भारत में इस वर्ष अल नीनो के कारण मानसून में कमी की चेतावनी दी गई है, जिससे खेती, जल संकट और खाद्य कीमतों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। सरकार ने किसानों के लिए तैयारी शुरू कर दी है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि स्थिति गंभीर है।
- 01विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने अल नीनो के कारण कमजोर मानसून और लंबी गर्मी की चेतावनी दी है।
- 02अल नीनो के प्रभाव से जून से सितंबर तक बारिश सामान्य से कम रहने की संभावना है।
- 03कृषि मंत्रालय ने राज्यों को जिला स्तर पर कंटीजेंसी प्लान लागू करने के निर्देश दिए हैं।
- 04सरकार कम पानी में उगने वाली फसलों और आधुनिक सिंचाई तकनीकों को बढ़ावा दे रही है।
- 05मौसम आधारित कृषि सलाह सेवाओं को मजबूत किया जा रहा है ताकि किसानों को समय पर जानकारी मिल सके।
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भारत में इस वर्ष अल नीनो के प्रभाव से मौसम की स्थिति चिंताजनक हो गई है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने चेतावनी दी है कि प्रशांत महासागर में अल नीनो के कारण मानसून कमजोर हो सकता है, जिससे खेती, जल संकट और खाद्य कीमतों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अल नीनो मजबूत हुआ तो जून से सितंबर तक बारिश सामान्य से कम रह सकती है। इससे खरीफ फसलों की बुआई में देरी और उत्पादन में कमी हो सकती है। कृषि मंत्रालय ने राज्यों को जिला स्तर पर कंटीजेंसी प्लान लागू करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही, सरकार कम पानी में उगने वाली फसलों और आधुनिक सिंचाई तकनीकों को बढ़ावा देने की योजना बना रही है। मौसम आधारित कृषि सलाह सेवाओं को भी मजबूत किया जा रहा है ताकि किसानों को समय पर बारिश और तापमान की जानकारी मिल सके। इस प्रकार की तैयारी से किसानों को नुकसान कम करने में मदद मिलेगी।
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कम बारिश से कृषि उत्पादन में कमी और जल संकट की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
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