पाकिस्तान में दवाओं का संकट: महंगाई और युद्ध का प्रभाव
कैसे बचेगी जान? आटा-तेल के बाद अब पाकिस्तान में इस चीन की मारा-मारी
Aaj Tak
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पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था गंभीर संकट में है, जहां अमेरिका-ईरान तनाव और मध्य पूर्व युद्ध के चलते दवाओं की कीमतें बढ़ रही हैं। लाहौर, कराची और पेशावर जैसे शहरों में दवाओं की भारी कमी हो रही है, जिससे मरीजों को इलाज में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।
- 01पाकिस्तान में दवाओं की कीमतें 2023 से लगातार बढ़ रही हैं।
- 02महंगी दवाओं के कारण लोग गंभीर वित्तीय संकट में फंस रहे हैं।
- 03शहबाज शरीफ सरकार ने दवा प्रोडक्शन पर 18% सेल्स टैक्स लगाया है।
- 04पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर अमेरिका-ईरान तनाव का गहरा असर है।
- 05कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि से महंगाई और बढ़ रही है।
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पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति बेहद खराब है, जिसके कारण दवाओं का संकट और बढ़ गया है। अमेरिका-ईरान तनाव और मध्य पूर्व युद्ध के चलते दवाओं की कीमतें बढ़ रही हैं, जिससे मरीजों को इलाज में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। लाहौर, कराची और पेशावर जैसे शहरों के सरकारी अस्पतालों में दवाओं की भारी कमी है। रिपोर्ट के अनुसार, 2023 से दवाओं की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, और 2024 में ये लगभग 50% तक बढ़ने की संभावना है। इसके अलावा, शहबाज शरीफ सरकार ने दवा उत्पादन पर 18% सामान्य सेल्स टैक्स लगाया है, जिससे आम जनता की मुसीबतें बढ़ गई हैं। पाकिस्तान के आयात बिल में वृद्धि और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव ने स्थिति को और बिगाड़ दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा संकट आयातित ऊर्जा पर अत्यधिक निर्भरता है, जो कि 85-90% खाड़ी देशों से आती है।
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पाकिस्तान में दवाओं की कमी और महंगाई से आम जनता को गंभीर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है।
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