पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर ईरान-अमेरिका तनाव का प्रभाव: महंगाई और जीडीपी में गिरावट की आशंका
ईरान-अमेरिका तनाव निकालेगा पाकिस्तान का 'तेल', अभी और बढ़ेगी महंगाई, गिरेगी GDP
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मीडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ने की संभावना है। टॉपलाइन सिक्योरिटीज की रिपोर्ट के अनुसार, महंगाई 9-10 प्रतिशत तक पहुंच सकती है और जीडीपी वृद्धि दर 2.5-3.0 प्रतिशत के बीच रह सकती है।
- 01पाकिस्तान में महंगाई 9-10 प्रतिशत रहने की संभावना है।
- 02वित्त वर्ष 2026 की जीडीपी वृद्धि दर 2.5-3.0 प्रतिशत के बीच रह सकती है।
- 03तेल की कीमतों में वृद्धि से महंगाई में 50 आधार अंकों की बढ़ोतरी हो सकती है।
- 04पाकिस्तानी रुपया 298 रुपए प्रति डॉलर तक गिर सकता है।
- 05पाकिस्तान अपनी ऊर्जा जरूरतों का 85 प्रतिशत आयात करता है।
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मीडिल ईस्ट में तनाव के चलते पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव पड़ने की संभावना है। टॉपलाइन सिक्योरिटीज की रिपोर्ट में बताया गया है कि यदि स्थिति स्थिर रहती है, तो अगले 12 महीनों में महंगाई दर 9-10 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। तेल की कीमतों में वृद्धि से महंगाई में 50 आधार अंकों की बढ़ोतरी हो सकती है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि वित्त वर्ष 2026 के अंत तक जीडीपी वृद्धि दर 2.5-3.0 प्रतिशत के बीच रह सकती है, जो पहले के 4.0 प्रतिशत के अनुमान से काफी कम है। इसके अलावा, पाकिस्तानी रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 298 रुपए तक गिर सकता है। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था आयातित ऊर्जा पर अत्यधिक निर्भर है, जो इसकी कुल ऊर्जा जरूरतों का 85 प्रतिशत है।
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महंगाई और जीडीपी में गिरावट से पाकिस्तान के आम नागरिकों की आर्थिक स्थिति प्रभावित होगी, जिससे उनकी खरीद क्षमता कम होगी।
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