CDS अनिल चौहान ने आधुनिक युद्ध में तकनीकी नवाचार की आवश्यकता पर जोर दिया
'युद्ध के तरीके तेजी से बदल रहे', CDS अनिल चौहान ने टेक्नोलॉजी और इनोवेशन की भूमिका पर दिया जोर

Image: Jagran
CDS अनिल चौहान ने शिरडी में एक रक्षा विनिर्माण परिसर के उद्घाटन के दौरान कहा कि आधुनिक युद्ध के तरीकों में तेजी से बदलाव आ रहा है। उन्होंने बताया कि भविष्य के संघर्षों में तकनीकी नवाचार जैसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ड्रोन और साइबर तकनीक महत्वपूर्ण होंगे। भारत का घरेलू रक्षा उत्पादन 1.27 लाख करोड़ रुपए के स्तर पर पहुंच गया है।
- 01CDS अनिल चौहान ने कहा कि युद्ध अब सिर्फ जनशक्ति या पारंपरिक हथियारों पर निर्भर नहीं है।
- 02भविष्य के युद्ध बहु-क्षेत्रीय होंगे, जिसमें भूमि, समुद्र, वायु, साइबर और अंतरिक्ष युद्ध शामिल होंगे।
- 03भारत का घरेलू रक्षा उत्पादन 1.27 लाख करोड़ रुपए (लगभग $15.3 बिलियन USD) तक पहुंच गया है।
- 04भारत 100 से अधिक देशों को रक्षा उत्पाद निर्यात कर रहा है, जिसमें निर्यात 38,000 करोड़ रुपए (लगभग $4.6 बिलियन USD) से अधिक है।
- 05निबे लिमिटेड जैसी निजी कंपनियों की भूमिका स्वदेशी रक्षा विनिर्माण में बढ़ती जा रही है।
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शिरडी, महाराष्ट्र में निबे लिमिटेड के रक्षा और एयरोस्पेस विनिर्माण परिसर के उद्घाटन के अवसर पर, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ अनिल चौहान ने आधुनिक युद्ध के तरीकों में तेजी से बदलाव की बात की। उन्होंने बताया कि आज का युद्ध केवल जनशक्ति या पारंपरिक हथियारों पर निर्भर नहीं है, बल्कि इसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिक्स, साइबर सिस्टम, और ड्रोन जैसी तकनीकों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। जनरल चौहान ने कहा कि भविष्य के युद्ध बहु-क्षेत्रीय होंगे, जिसमें भूमि, समुद्र, वायु, साइबर और अंतरिक्ष युद्ध एक साथ संचालित होंगे। उन्होंने भारत के बढ़ते घरेलू रक्षा उत्पादन का उल्लेख करते हुए कहा कि यह 1.27 लाख करोड़ रुपए (लगभग $15.3 बिलियन USD) के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। इसके साथ ही, भारत 100 से अधिक देशों को रक्षा उत्पाद निर्यात कर रहा है, जिसमें निर्यात 38,000 करोड़ रुपए (लगभग $4.6 बिलियन USD) से अधिक है। जनरल चौहान ने निबे लिमिटेड जैसी निजी कंपनियों की भूमिका को स्वदेशी रक्षा विनिर्माण में बढ़ते विश्वास का प्रतीक बताया।
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भारत के बढ़ते रक्षा विनिर्माण से स्थानीय उद्योगों को प्रोत्साहन मिलेगा और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा।
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