आरबीआई का रुपये को वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाने का संकल्प जारी
RBI का बड़ा संकेत, रुपये को दुनिया में मजबूत बनाने का प्लान अभी भी जारी
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भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने रुपये के अंतरराष्ट्रीयकरण के लिए अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया है। डिप्टी गवर्नर टी रवि शंकर ने कहा कि डॉलर-रुपये के लिए एकल वैश्विक बाजार बनाने का लक्ष्य अभी भी कायम है, जबकि अस्थायी प्रतिबंधों का उद्देश्य घरेलू मुद्रा में अस्थिरता को नियंत्रित करना है।
- 01आरबीआई रुपये के अंतरराष्ट्रीयकरण के लिए प्रतिबद्ध है।
- 02डॉलर-रुपये के लिए एकल वैश्विक बाजार बनाने का लक्ष्य जारी है।
- 03बैंकों के लिए अस्थायी प्रतिबंधों का उद्देश्य मुद्रा अस्थिरता को नियंत्रित करना है।
- 04रुपये के डेरिवेटिव में कुछ प्रतिबंधों में ढील दी गई है।
- 05आरबीआई ने बैंकों को नॉन-डिलीवरेबल फॉरवर्ड पेशकश की अनुमति दी है।
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भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने रुपये के अंतरराष्ट्रीयकरण और डॉलर-रुपये के लिए एकल वैश्विक बाजार बनाने की अपनी प्रतिबद्धता को फिर से स्पष्ट किया है। आरबीआई के डिप्टी गवर्नर टी रवि शंकर ने कहा कि हाल के अस्थायी प्रतिबंधों का उद्देश्य घरेलू मुद्रा में अत्यधिक अस्थिरता को नियंत्रित करना है। उन्होंने बताया कि 27 मार्च से 20 अप्रैल के बीच रुपये में 2 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इस सप्ताह आरबीआई ने रुपये के डेरिवेटिव में बैंकों के आर्बिट्राज ट्रेडों पर कुछ प्रतिबंधों में ढील दी है, जिससे बैंकों को नॉन-डिलीवरेबल फॉरवर्ड की पेशकश करने की अनुमति मिली है। यह कदम रुपये के अंतरराष्ट्रीय उपयोग को बढ़ावा देने के लिए उठाया गया है।
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अगर रुपये का अंतरराष्ट्रीयकरण सफल होता है, तो यह भारतीय व्यापारियों और निर्यातकों के लिए फायदेमंद हो सकता है।
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