पश्चिम एशिया संकट: RBI की मौद्रिक नीति पर बढ़ा दबाव
पश्चिम एशिया संकट से RBI भी चिंतित, क्या महंगाई और विकास दोनों पर बढ़ गया है खतरा?
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पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में चर्चा को प्रभावित किया है। MPC ने नीतिगत रीपो दर को अपरिवर्तित रखने का निर्णय लिया है, जबकि बाहरी परिस्थितियों के बिगड़ने के जोखिम और मुद्रास्फीति पर दबाव की आशंका जताई गई है।
- 01MPC ने नीतिगत रीपो दर को अपरिवर्तित रखा है।
- 02बाहरी क्षेत्र में हालात बिगड़ने की संभावना है।
- 03अल नीनो की स्थिति मुद्रास्फीति को प्रभावित कर सकती है।
- 04RBI के गवर्नर ने भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती की बात की।
- 05पश्चिम एशिया संघर्ष से भारत की वृद्धि-मुद्रास्फीति संतुलन पर असर पड़ सकता है।
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पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की अप्रैल बैठक में चर्चा को प्रभावित किया। MPC के सदस्यों ने सर्वसम्मति से नीतिगत रीपो दर को अपरिवर्तित रखने का निर्णय लिया है और अनिश्चितता के बीच तटस्थ नीति रुख बनाए रखने पर सहमति जताई। सदस्यों ने बाहरी क्षेत्र में हालात बिगड़ने के जोखिम की ओर इशारा किया है, जिससे चालू खाते के घाटे में बढ़ोतरी की संभावना है। साथ ही, अल नीनो की परिस्थितियों के कारण मुद्रास्फीति पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई गई। RBI के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था पहले से अधिक मजबूत स्थिति में है और यह झटकों को सहन करने में सक्षम है। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि यदि संघर्ष लंबे समय तक जारी रहता है, तो यह केंद्रीय बैंकों के लिए मुद्रास्फीति की अपेक्षाओं को नियंत्रित करने में कठिनाई पैदा कर सकता है। MPC के सदस्यों ने यह भी कहा कि मौद्रिक नीति की क्षमता आपूर्ति-जनित मुद्रास्फीति के प्रत्यक्ष प्रभावों को कम करने में सीमित है।
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पश्चिम एशिया में संघर्ष के चलते भारत में मुद्रास्फीति बढ़ सकती है, जिससे उपभोक्ताओं पर वित्तीय दबाव बढ़ेगा।
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