सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में आरोपी को सुनने का अधिकार अनिवार्य
'आरोपी की बात सुनना जरूरी', ED को सुप्रीम कोर्ट का झटका; PMLA केस को लेकर दिया बड़ा फैसला
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Image: Jagran
भारत के सुप्रीम कोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग (PMLA) मामलों में आरोपी को निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार देने का ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) की दलील को खारिज करते हुए कहा कि आरोपी का पक्ष सुनना अनिवार्य है, अन्यथा किसी भी मामले का संज्ञान लेना कानूनी रूप से अमान्य होगा।
- 01सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार है।
- 02यदि कोई कोर्ट आरोपी को बिना सुने मामले का संज्ञान लेती है, तो वह कानूनी प्रक्रिया अमान्य मानी जाएगी।
- 03अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) की दलील को खारिज किया कि PMLA एक विशेष कानून है और इस पर सामान्य नियम लागू नहीं होते।
- 04अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) एसवी राजू ने दलील दी थी कि PMLA के तहत बनी विशेष अदालतों को BNSS की सामान्य प्रक्रियाओं का पालन करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।
- 05मामला ED की शिकायत से जुड़ा है, जो PMLA की धारा 44 और 45 के तहत दायर की गई थी।
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सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में मनी लॉन्ड्रिंग (PMLA) मामलों में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि किसी आरोपी को निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार देना अनिवार्य है। जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस एनके सिंह की पीठ ने स्पष्ट किया कि आरोपी का पक्ष सुनना आवश्यक है, अन्यथा किसी भी मामले का संज्ञान लेना कानूनी रूप से अमान्य होगा। अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) की दलील को खारिज करते हुए कहा कि PMLA एक विशेष कानून है और इस पर सामान्य नियम लागू नहीं होते। यह निर्णय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकारों की रक्षा करता है। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) एसवी राजू ने अदालत में दलील दी थी कि PMLA के तहत बनी विशेष अदालतों को BNSS (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता) की सामान्य प्रक्रियाओं का पालन करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। हालांकि, अदालत ने इस पर सख्त रुख अपनाया और कहा कि आरोपी को सुनवाई का मौका दिए बिना किसी भी कानूनी प्रक्रिया को मान्य नहीं माना जाएगा। यह मामला ED की शिकायत से जुड़ा है, जो PMLA की धारा 44 और 45 के तहत दायर की गई थी।
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इस फैसले से मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में आरोपी व्यक्तियों को सुनवाई का अधिकार मिलने से उनके लिए कानूनी प्रक्रिया में सुधार होगा।
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