मद्रास हाई कोर्ट का फैसला: मंगलसूत्र हटाना मानसिक क्रूरता के अंतर्गत आता है
'हिंदू पत्नी का मंगलसूत्र हटाना पति के प्रति मानसिक क्रूरता', मद्रास हाई कोर्ट का बड़ा फैसला
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मद्रास उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि एक हिंदू पत्नी द्वारा मंगलसूत्र हटाना पति के प्रति मानसिक क्रूरता है। यह फैसला एक दंपति के तलाक के मामले में दिया गया, जो पिछले 30 वर्षों से अलग रह रहे थे।
- 01मद्रास उच्च न्यायालय ने मंगलसूत्र हटाने को मानसिक क्रूरता माना है।
- 02यह फैसला 30 साल से अधिक समय से अलग रह रहे दंपति के मामले में आया है।
- 03अदालत ने पत्नी की अपील को खारिज करते हुए तलाक के निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा।
- 04कोर्ट ने हिंदू विवाह अधिनियम और परंपराओं का हवाला देते हुए यह निर्णय लिया।
- 05अदालत ने कहा कि 30 वर्षों से अलग रह रहे दंपति के बीच वैवाहिक संबंध पूरी तरह से टूट चुके हैं।
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मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि एक हिंदू पत्नी द्वारा मंगलसूत्र हटाना पति के प्रति 'मानसिक क्रूरता' की श्रेणी में आता है। यह फैसला एक दंपति के तलाक के मामले में आया है, जो पिछले 30 वर्षों से अलग रह रहे थे। जस्टिस पी. वड़ामलई की पीठ ने पत्नी द्वारा निचली अदालत के तलाक के आदेश को चुनौती देने वाली अपील को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि एक विवाहित हिंदू महिला के लिए मंगलसूत्र का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व होता है, और इसे वैवाहिक बंधन का प्रतीक माना जाता है। कोर्ट ने यह भी कहा कि इतने लंबे समय से अलग रहने वाले दंपति के बीच वैवाहिक संबंध पूरी तरह से समाप्त हो चुके हैं, इसलिए इस मृतप्राय रिश्ते को जबरन बनाए रखने का कोई औचित्य नहीं है।
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यह निर्णय हिंदू विवाह के संदर्भ में मानसिक क्रूरता के मामलों को प्रभावित कर सकता है।
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