महिलाओं की घरेलू जिम्मेदारियों का बोझ: रिपोर्ट में खुलासा
घर के काम में महिलाएं रोज 5 घंटे से ज्यादा देती हैं, पुरुष सिर्फ 88 मिनट! रिपोर्ट ने खोल दी बड़ी सच्चाई
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भारत में महिलाओं की घरेलू कामों में भागीदारी पुरुषों की तुलना में तीन गुना अधिक है, जिनका औसत समय 5 घंटे है, जबकि पुरुष केवल 88 मिनट ही घरेलू कामों में लगाते हैं। यह आंकड़ा महिलाओं की दोहरी जिंदगी और सामाजिक बदलाव की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत है।
- 01महिलाएं औसतन 289 मिनट (5 घंटे) घरेलू कामों में बिताती हैं, पुरुष केवल 88 मिनट
- 02महिलाओं का उच्च शिक्षा में ग्रॉस एनरोलमेंट रेशियो 30.2 है, जबकि पुरुषों का 28.9
- 03ग्रामीण महिलाओं की श्रम भागीदारी दर 37.5% से बढ़कर 45.9% हुई
- 04प्रबंधकीय पदों पर महिलाओं की संख्या में 100% से अधिक की वृद्धि
- 05बदलते सामाजिक सोच के संकेत, जैसे जन्म के समय लिंग अनुपात में सुधार
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भारत में महिलाओं की घरेलू जिम्मेदारियों का बोझ पुरुषों की तुलना में तीन गुना अधिक है। केंद्र सरकार के सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय द्वारा जारी 'महिलाएं और पुरुष भारत में 2025' रिपोर्ट के अनुसार, महिलाएं औसतन 289 मिनट (करीब 5 घंटे) घरेलू कामों में व्यतीत करती हैं, जबकि पुरुष केवल 88 मिनट ही इन कामों में शामिल होते हैं। इस रिपोर्ट में यह भी दर्शाया गया है कि उच्च शिक्षा में महिलाओं का ग्रॉस एनरोलमेंट रेशियो 30.2 है, जो पुरुषों के 28.9 से अधिक है। इसके अलावा, ग्रामीण महिलाओं की श्रम भागीदारी दर 37.5% से बढ़कर 45.9% तक पहुंच गई है। हालांकि, प्रबंधकीय पदों पर महिलाओं की संख्या में 100% से अधिक की वृद्धि हुई है, लेकिन घरेलू जिम्मेदारियों का संतुलन अभी भी नहीं बन पाया है। यह रिपोर्ट महिलाओं की शिक्षा और रोजगार में बढ़ती भागीदारी को सकारात्मक बदलाव के संकेत के रूप में देखती है।
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महिलाओं की बढ़ती शिक्षा और रोजगार में भागीदारी से समाज में लैंगिक समानता की दिशा में सकारात्मक बदलाव की संभावना है।
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