प्रधानमंत्री मोदी की वर्क फ्रॉम होम अपील का रियल एस्टेट सेक्टर पर संभावित प्रभाव
पीएम मोदी की वर्क फ्रॉम होम अपील से रियल एस्टेट सेक्टर पर क्या पड़ेगा असर?
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्क फ्रॉम होम को बढ़ावा देने की अपील की है, जिसका असर भारत के रियल एस्टेट सेक्टर पर पड़ सकता है। यदि कंपनियां हाइब्रिड मॉडल अपनाती हैं, तो ऑफिस स्पेस की मांग में कमी आ सकती है, जबकि बड़े और बेहतर घरों की मांग बढ़ सकती है।
- 01प्रधानमंत्री मोदी की अपील से वर्क फ्रॉम होम की चर्चा बढ़ी है।
- 02ऑफिस रियल एस्टेट पर असर पड़ सकता है, खासकर बड़े ऑफिस स्पेस की मांग में कमी।
- 03हाइब्रिड वर्क मॉडल के चलते छोटे और स्मार्ट ऑफिस की मांग बढ़ सकती है।
- 04रेजिडेंशियल रियल एस्टेट में बड़े घरों की मांग फिर से बढ़ सकती है।
- 05टियर-2 और टियर-3 शहरों में रियल एस्टेट की मांग में वृद्धि हो सकती है।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच वर्क फ्रॉम होम की अपील की है। यह अपील ईंधन की बचत और विदेशी मुद्रा पर दबाव कम करने के उद्देश्य से की गई है। यदि कंपनियां बड़े स्तर पर वर्क फ्रॉम होम या हाइब्रिड मॉडल अपनाती हैं, तो इसका असर भारत के रियल एस्टेट सेक्टर पर पड़ सकता है। पिछले दो वर्षों में भारतीय कमर्शियल रियल एस्टेट में तेजी आई थी, लेकिन अब ऑफिस स्पेस की मांग में कमी आ सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनियां छोटे और फ्लेक्सिबल ऑफिस स्पेस की ओर बढ़ सकती हैं। दूसरी ओर, रेजिडेंशियल रियल एस्टेट में बड़े और बेहतर डिजाइन वाले घरों की मांग बढ़ सकती है। इसके अलावा, टियर-2 और टियर-3 शहरों में भी रियल एस्टेट की मांग बढ़ने की संभावना है। हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल इस अपील का तुरंत कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा।
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यदि कंपनियां वर्क फ्रॉम होम को अपनाती हैं, तो इससे ऑफिस स्पेस की मांग में कमी आ सकती है, जिससे रियल एस्टेट डेवलपर्स को नुकसान हो सकता है। वहीं, बड़े घरों की मांग बढ़ने से रेजिडेंशियल सेक्टर को फायदा हो सकता है।
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