नेपाल के पीएम बालेन्द्र शाह का लिपुलेख विवाद पर बयान: दोनों देशों की जमीन पर कब्जे के आरोप
लिपुलेख विवाद पर बोले नेपाली PM- दोनों देशों के कब्जे में एक-दूसरे की जमीन

Image: Aaj Tak
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने लिपुलेख और अन्य विवादित क्षेत्रों पर भारत के साथ सीमा विवाद को सुलझाने की दिशा में कूटनीतिक प्रयासों की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि दोनों देशों ने एक-दूसरे पर जमीन के कब्जे के आरोप लगाए हैं और समाधान के लिए विशेषज्ञों की मदद ली जाएगी।
- 01प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने कहा कि नेपाल ने भारत को कूटनीतिक नोट भेजा है जिसमें लिपुलेख पर कब्जे का मुद्दा उठाया गया है।
- 02दोनों देशों ने इस विवाद को सुलझाने के लिए इतिहासकारों और विशेषज्ञों की मदद लेने पर सहमति जताई है।
- 03शाह ने कहा कि यह विवाद केवल भारत-नेपाल के बीच नहीं, बल्कि ब्रिटिश इंडिया के समय से जुड़ा है।
- 04नेपाल में शाह के बयान पर विवाद उठ गया है, कई यूज़र्स ने इसे तथ्यहीन बताया है।
- 05पूर्व राजदूतों ने नेपाल के भारत की जमीन पर कब्जे के दावे को खारिज किया है।
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नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने लिपुलेख और अन्य विवादित क्षेत्रों पर भारत के साथ सीमा विवाद को सुलझाने के लिए कूटनीतिक प्रयासों की पुष्टि की है। उन्होंने संसद में कहा कि नेपाल ने भारत को एक आधिकारिक कूटनीतिक नोट भेजा है जिसमें लिपुलेख पर कब्जे का मुद्दा उठाया गया है। दोनों देशों ने इस विवाद को सुलझाने के लिए सहमति जताई है, जिसमें इतिहासकारों और विशेषज्ञों की मदद ली जाएगी। शाह ने यह भी कहा कि यह विवाद केवल भारत-नेपाल के बीच नहीं है, बल्कि इसकी जड़ें ब्रिटिश इंडिया के दौर से जुड़ी हुई हैं। हालांकि, उनके बयान पर नेपाल में विवाद उत्पन्न हो गया है, जहां कई यूज़र्स ने इसे तथ्यहीन बताया है। पूर्व राजदूतों ने भी नेपाल के भारत की जमीन पर कब्जे के दावे को खारिज किया है।
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नेपाल और भारत के बीच सीमा विवाद के समाधान के प्रयासों से दोनों देशों के नागरिकों के बीच संबंध प्रभावित हो सकते हैं।
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