महिला आरक्षण-परिसीमन बिल: INDIA गठबंधन का विरोध और सरकार की चुनौती
महिला आरक्षण-परिसीमन बिल: संविधान संशोधन रोकने के नंबर गेम के लिए INDIA गठबंधन ने बिछाई बिसात
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महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन बिल को लोकसभा में पेश किया गया, लेकिन सरकार के पास इसे पारित कराने के लिए आवश्यक दो तिहाई बहुमत नहीं है। विपक्षी दलों ने 200 से अधिक वोटों के खिलाफ होने का दावा किया है, जिससे बिल का पारित होना मुश्किल हो गया है।
- 01महिला आरक्षण और परिसीमन बिल को पारित करने के लिए 362 वोटों की आवश्यकता है।
- 02विपक्ष के पास 200 से अधिक वोटों का समर्थन होने की संभावना है।
- 03बीजू जनता दल (BJD) ने पहली बार विपक्ष का समर्थन किया है।
- 04कांग्रेस ने सहयोगी दलों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए वरिष्ठ नेताओं को जिम्मेदारी दी है।
- 05महिला आरक्षण-परिसीमन बिल का पारित होना लगभग असंभव प्रतीत हो रहा है।
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महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन बिल को लोकसभा में पेश करने के बाद यह स्पष्ट हो गया कि सरकार के पास इसे पारित कराने के लिए आवश्यक दो तिहाई बहुमत नहीं है। लोकसभा में 543 सदस्यों में से 362 वोटों की आवश्यकता होती है, जबकि विरोध में 185 वोट पहले ही पड़ चुके हैं। विपक्षी दलों का अनुमान है कि उनके पास 200 से अधिक वोट होंगे। कांग्रेस ने अपने सहयोगी दलों के सांसदों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए वरिष्ठ नेताओं को जिम्मेदारी दी है। बीजू जनता दल (BJD) ने भी इस मुद्दे पर विपक्ष का समर्थन किया है, हालांकि उनके पास लोकसभा में कोई सांसद नहीं है। इस स्थिति में, महिला आरक्षण-परिसीमन बिल का पारित होना लगभग असंभव प्रतीत हो रहा है।
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यदि यह बिल पारित नहीं होता है, तो महिला आरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति रुक जाएगी, जिससे महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी प्रभावित होगी।
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