भारत की सोने की कहानी: संकट में गोल्ड का महत्व
जब-जब भारत पर आया संकट, सोने ने बचाई देश की लाज; क्या है हिंदुस्तान की 'गोल्डन' कहानी?
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से एक साल तक सोना न खरीदने की अपील की है, ताकि विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखा जा सके। भारत, जो सोने का सबसे बड़ा आयातक है, को इस समय कच्चे तेल की अधिक आवश्यकता है। ऐतिहासिक दृष्टि से, सोने ने कई बार देश को आर्थिक संकट से उबारा है।
- 01प्रधानमंत्री मोदी ने सोने की खरीद पर रोक लगाने की अपील की है।
- 02भारत सोने का सबसे बड़ा आयातक है, लेकिन वर्तमान में कच्चे तेल की अधिक आवश्यकता है।
- 031962 में भारत-चीन युद्ध के दौरान सोने का संकट आया था।
- 041991 में भारत ने विदेशी मुद्रा संकट से उबरने के लिए सोना गिरवी रखा।
- 052013 में रुपये की गिरावट के दौरान भी सोने के आयात को नियंत्रित करने के लिए कदम उठाए गए।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से अपील की है कि अगले एक साल तक सोना न खरीदें, ताकि भारत की विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखा जा सके। भारत, जो दुनिया में सोने का सबसे बड़ा आयातक है, को वर्तमान में कच्चे तेल की अधिक आवश्यकता है। ऐतिहासिक रूप से, सोने ने कई बार भारत को आर्थिक संकटों से उबारा है। 1962 में भारत-चीन युद्ध के दौरान, वित्त मंत्री मोरारजी देसाई ने 'गोल्ड कंट्रोल एक्ट' लागू किया था, जिससे सोने की कालाबाजारी को रोकने का प्रयास किया गया था। 1991 में, जब भारत का विदेशी मुद्रा भंडार खाली हो गया था, तब सरकार ने बैंक ऑफ इंग्लैंड और यूनियन बैंक ऑफ स्विट्जरलैंड में 47 टन सोना गिरवी रखा था, जिससे आर्थिक उदारीकरण की प्रक्रिया शुरू हुई। 2013 में, रुपये की गिरावट के कारण सोने के आयात पर नियंत्रण के लिए 80:20 स्कीम लागू की गई थी। अब, मिडिल ईस्ट के संकट के चलते, मोदी सरकार ने सोने की खरीद पर रोक लगाने की अपील की है ताकि विदेशी मुद्रा का उपयोग कच्चे तेल के आयात में किया जा सके।
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सोने की खरीद पर रोक लगाने से देश की विदेशी मुद्रा भंडार सुरक्षित रहेगी, जिससे कच्चे तेल के आयात के लिए धन उपलब्ध होगा।
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