नई तकनीक से प्लास्टिक कचरे से बनेगा जैव कार्बन, जल और भूमि को करेगा साफ
अब प्लास्टिक कचरे से बनेगा जैव कार्बन, गंदा पानी और जमीन को बनाएगा उपयोगी; CIPET ने विकसित की नई तकनीक
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केंद्रीय पेट्रोकेमिकल्स इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (CIPET) और बाबा साहब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय ने एक नई तकनीक विकसित की है, जिससे प्लास्टिक कचरे से जैव कार्बन बनाया जाएगा। यह तकनीक जल शुद्धिकरण में सहायक होगी और भूमि प्रदूषण को कम करेगी।
- 01CIPET और बाबा साहब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय ने प्लास्टिक कचरे से जैव कार्बन बनाने की तकनीक विकसित की है।
- 02यह तकनीक दूषित जल को साफ करने और भूमि प्रदूषण को कम करने में मदद करेगी।
- 03जैव कार्बन का उपयोग जल शोधक यंत्रों की लागत को कम कर सकता है।
- 04इससे पुनर्चक्रण उद्योग को नई दिशा मिलेगी और पर्यावरण संरक्षण में मदद मिलेगी।
- 05जैव कार्बन, जीवित स्रोतों से प्राप्त होने वाला कार्बन है, जो पर्यावरण के अनुकूल है।
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केंद्रीय पेट्रोकेमिकल्स इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (CIPET) और बाबा साहब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय ने मिलकर एक नई तकनीक विकसित की है, जिससे फेंकी गई प्लास्टिक की पन्नी से जैव कार्बन बनाया जाएगा। यह तकनीक प्लास्टिक कचरे को नष्ट करने के साथ-साथ दूषित जल की गुणवत्ता को सुधारने में भी सहायक होगी। शोध के अनुसार, प्लास्टिक को 'ताप-अपघटन' प्रक्रिया से गुजारा जाता है, जिससे यह कार्बन-युक्त पदार्थ में परिवर्तित होता है। इसके बाद इसे शुद्ध कर जैव-कार्बन में बदला जाता है, जो जल शुद्धिकरण में अत्यधिक प्रभावी साबित होता है। इस तकनीक से जल शोधक यंत्रों की लागत में कमी लाई जा सकती है और उनकी कार्य-अवधि बढ़ाई जा सकती है। इसके अलावा, यह तकनीक पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी, जिससे प्लास्टिक कचरे की मात्रा में कमी आएगी और जल एवं वायु की गुणवत्ता में सुधार होगा।
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इस तकनीक से शहरों में प्लास्टिक कचरे की मात्रा में कमी आएगी, जिससे जल और वायु की गुणवत्ता में सुधार होगा।
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