ईरान की रणनीति से UN में अमेरिका और अरब देशों की हार
ईरान की रणनीति से UN में पलटा पूरा गेम; अरब प्रस्ताव पर लगा ब्रेक, देखता रह गया अमेरिका
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ईरान ने अपनी रणनीति के तहत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अमेरिका, इजरायल और अरब देशों को पराजित किया है। रूस, चीन और फ्रांस ने अरब देशों द्वारा प्रस्तुत एक प्रस्ताव को वीटो कर दिया, जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य में सैन्य कार्रवाई की अनुमति मांगी गई थी। यह प्रस्ताव वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी असर डाल सकता है।
- 01ईरान ने UN में अमेरिका और अरब देशों को पराजित किया।
- 02रूस, चीन और फ्रांस ने अरब देशों के प्रस्ताव को वीटो किया।
- 03प्रस्ताव में होर्मुज जलडमरूमध्य में सैन्य कार्रवाई की अनुमति मांगी गई थी।
- 0428 फरवरी 2026 को ईरान पर अमेरिका और इजरायल का हमला हुआ था।
- 05इस नाकेबंदी से वैश्विक ऊर्जा बाजार पर बड़ा असर पड़ा है।
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मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच, ईरान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में अमेरिका, इजरायल और अरब देशों को एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पर पराजित किया है। अरब देशों ने होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने के लिए सैन्य कार्रवाई की इजाजत देने की मांग की थी, लेकिन रूस, चीन और फ्रांस ने इस प्रस्ताव को वीटो कर दिया। इस प्रस्ताव में अंतरराष्ट्रीय समुद्री यातायात को सुरक्षित करने के लिए सभी आवश्यक साधनों के उपयोग की अनुमति मांगी गई थी। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन ने इस प्रस्ताव को “अवास्तविक” बताते हुए चेतावनी दी है कि इससे ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स का खतरा बढ़ सकता है। यह जलमार्ग दुनिया के करीब 20% तेल और गैस आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण है। ईरान ने 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल के हमले के बाद इस जलमार्ग को बंद कर दिया था, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार पर बड़ा असर पड़ा है।
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इस प्रस्ताव के विफल होने से होर्मुज जलडमरूमध्य में सैन्य कार्रवाई की संभावना समाप्त हो गई है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में स्थिरता बनी रह सकती है।
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