46 साल पहले अमेरिका ने ईरान में राजनयिकों को बचाने के लिए रचा था 'आर्गो' का नकली फिल्म प्लॉट
तेहरान में बंधक थे छह अमेरिकी, रेस्क्यू के लिए CIA ने पूरी पिक्चर ही बना डाली! 46 साल पुरानी वो सच्ची कहानी
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1979 में ईरान में अमेरिकी दूतावास पर हमले के दौरान, छह अमेरिकी राजनयिकों को बचाने के लिए सीआईए ने 'आर्गो' नामक एक नकली फिल्म योजना बनाई। इस मिशन में टोनी मेंडेज़ ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिससे राजनयिकों को मौत के मुंह से बचाया गया।
- 011979 में ईरान में अमेरिकी दूतावास पर 66 अमेरिकियों को बंधक बनाया गया था।
- 02सीआईए ने राजनयिकों को बचाने के लिए 'आर्गो' नामक नकली फिल्म योजना बनाई।
- 03टोनी मेंडेज़ ने इस मिशन की योजना बनाई और इसे सफल बनाया।
- 04इस ऑपरेशन पर 2012 में एक फिल्म भी बनी, जिसमें बेन एफ्लेक ने मुख्य भूमिका निभाई।
- 05यह मिशन सालों तक गोपनीय रहा, लेकिन बाद में इसकी बहादुरी का पता चला।
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1979 में ईरान में अमेरिकी दूतावास पर हमले के दौरान, ईरानी प्रदर्शनकारियों ने 66 अमेरिकियों को बंधक बना लिया। इस स्थिति में छह अमेरिकी राजनयिकों ने कनाडाई राजदूत के घर में शरण ली। सीआईए के टोनी मेंडेज़ ने इन्हें बचाने के लिए 'आर्गो' नामक एक नकली फिल्म योजना बनाई। उन्होंने हॉलीवुड के मेकअप आर्टिस्ट जॉन चेम्बर्स की मदद से एक प्रोडक्शन ऑफिस खोला और राजनयिकों के लिए नकली पहचान पत्र तैयार किए। 27 जनवरी, 1980 को, जब इन राजनयिकों को तेहरान एयरपोर्ट से निकालने का समय आया, तो स्थिति तनावपूर्ण थी। अंततः, वे सुरक्षित रूप से अमेरिका लौट आए। इस मिशन की गोपनीयता को बरकरार रखने के लिए इसे कई वर्षों तक छिपाया गया, लेकिन 2012 में बेन एफ्लेक ने इस पर 'Argo' नामक फिल्म बनाई, जिससे इस साहसिक कार्य का खुलासा हुआ।
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