केन-बेतवा परियोजना: आदिवासियों का संघर्ष और विकास का सवाल
केन-बेतवा परियोजना MP: विकास की राह या आदिवासियों के अस्तित्व पर खतरा, बांध स्थल पर भड़का जनसंग्राम
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मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में केन-बेतवा लिंक परियोजना के खिलाफ आदिवासी और ग्रामीणों का आंदोलन उग्र हो गया है। प्रशासन ने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने बांध स्थल पर धरना दे दिया है। यह परियोजना विकास की राह बनेगी या स्थानीय लोगों के अस्तित्व पर खतरा साबित होगी, यह बड़ा सवाल है।
- 01केन-बेतवा लिंक परियोजना का काम छतरपुर जिले में ठप है।
- 02आदिवासी और ग्रामीण प्रशासन के खिलाफ धरना दे रहे हैं।
- 03प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों को समझाने की कोशिश की, लेकिन स्थिति तनावपूर्ण है।
- 04आंदोलनकारियों का कहना है कि उनकी जमीन और जीवन पर खतरा है।
- 05कलेक्टर ने बातचीत के माध्यम से समाधान की उम्मीद जताई है।
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मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में चल रही केन-बेतवा लिंक परियोजना के खिलाफ छतरपुर जिले में आदिवासी और ग्रामीणों का आंदोलन तेज हो गया है। 44,000 करोड़ रुपये की इस परियोजना का निर्माण कार्य लगातार दूसरे दिन ठप रहा। आंदोलनकारियों का आरोप है कि प्रशासन ने उन्हें दिल्ली जाने से रोका और उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। वे अपनी जमीन, जंगल और जीवन के अधिकारों की रक्षा के लिए धरने पर बैठे हैं। आंदोलन की अगुवाई कर रहे समाजसेवी अमित भटनागर ने कहा कि प्रदर्शनकारियों को प्रताड़ित किया गया है। वहीं, प्रशासन ने स्थिति को संभालने के लिए कई बार बातचीत की कोशिश की, लेकिन माहौल तनावपूर्ण होने के कारण कोई समाधान नहीं निकल सका। छतरपुर कलेक्टर पार्थ जायसवाल ने कहा है कि प्रदर्शनकारियों की जायज मांगों को पूरा किया जाएगा। इस स्थिति ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या यह परियोजना बुंदेलखंड के विकास का साधन बनेगी या स्थानीय लोगों के अस्तित्व पर खतरा साबित होगी।
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यह आंदोलन स्थानीय आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण है और यदि समाधान नहीं निकला, तो यह परियोजना प्रभावित हो सकती है।
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