वरुथिनी एकादशी का महत्व और व्रत विधि
Varuthini Ekadashi Vrat Katha : वरुथिनी एकादशी व्रत कथा, इस कथा का पाठ करने से बनता है सुरक्षा कवच
Nbt NavbharattimesImage: Nbt Navbharattimes
वरुथिनी एकादशी का व्रत वैशाख मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी को मनाया जाता है। इस दिन व्रत रखने से व्यक्ति सभी पापों से मुक्त होकर विष्णु लोक में स्थान प्राप्त करता है। यह व्रत सुरक्षा का कवच माना जाता है और इसके पालन से अनेक लाभ होते हैं।
- 01वरुथिनी एकादशी का व्रत वैशाख मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी को होता है।
- 02इस व्रत का पालन करने से व्यक्ति पापों से मुक्त होकर विष्णु लोक में स्थान प्राप्त करता है।
- 03व्रत में कुछ नियमों का पालन करना आवश्यक है, जैसे विशेष वस्तुओं का त्याग।
- 04इस व्रत का पाठ करने से सहस्र गोदान के समान फल मिलता है।
- 05यमराज से डरने वाले व्यक्तियों को इस व्रत का विशेष रूप से पालन करना चाहिए।
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वरुथिनी एकादशी का व्रत हर वर्ष वैशाख मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को मनाया जाता है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है और इसे सुरक्षा का कवच माना जाता है। इस दिन व्रत रखने से व्यक्ति सभी प्रकार के पापों से मुक्त हो जाता है और विष्णु लोक में स्थान प्राप्त करता है। युधिष्ठिर ने भगवान कृष्ण से इस एकादशी के महत्व के बारे में पूछा, जिसके उत्तर में कृष्ण ने बताया कि इस व्रत का पालन करने से व्यक्ति को इस लोक और परलोक में सौभाग्य की प्राप्ति होती है। व्रत के दौरान कुछ नियमों का पालन करना आवश्यक है, जैसे विशेष वस्तुओं का त्याग करना और ब्रह्मचर्य का पालन करना। द्वादशी तिथि को भी कुछ वस्तुओं का त्याग करना चाहिए। इस व्रत का पाठ करने से सहस्र गोदान का फल मिलता है और यमराज से डरने वाले व्यक्तियों को इसे अवश्य करना चाहिए।
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