सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमला विवाद पर उठाए महत्वपूर्ण सवाल
'जो अयप्पा के भक्त नहीं क्या वे परंपरा को चुनौती दे सकते हैं', SC का सवाल
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सुप्रीम कोर्ट में सबरीमला मंदिर के विवाद पर सुनवाई के दौरान, न्यायाधीशों ने पूछा कि जो लोग भगवान अयप्पा के भक्त नहीं हैं, वे कैसे मंदिर की परंपराओं को चुनौती दे सकते हैं। यह मामला धार्मिक स्वतंत्रता और जनहित याचिकाओं के दायरे में महत्वपूर्ण सवाल उठाता है।
- 01सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमला मंदिर की परंपराओं को चुनौती देने वाले याचिकाकर्ताओं की वैधता पर सवाल उठाया।
- 02मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने जनहित याचिकाओं के प्रति अदालत की सतर्कता पर जोर दिया।
- 03सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में 10 से 50 वर्ष की महिलाओं के मंदिर में प्रवेश पर लगे प्रतिबंध को असंवैधानिक करार दिया था।
- 04इस मामले में मूल याचिकाकर्ता इंडियन यंग लॉयर्स एसोसिएशन है, जो भक्त नहीं हैं।
- 05सुप्रीम कोर्ट ने धार्मिक स्वतंत्रता के मुद्दे पर महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं।
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सुप्रीम कोर्ट में सबरीमला मंदिर के विवाद पर चल रही सुनवाई में, न्यायाधीशों ने यह सवाल उठाया कि जो लोग भगवान अयप्पा के भक्त नहीं हैं, वे कैसे मंदिर की परंपराओं को चुनौती दे सकते हैं। न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से पूछा कि क्या कोई गैर-भक्त जनहित याचिका (PIL) दाखिल कर सकता है। इस पर तुषार मेहता ने बताया कि मूल याचिकाकर्ता इंडियन यंग लॉयर्स एसोसिएशन है, जो भक्त नहीं हैं। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने जनहित याचिकाओं के प्रति अदालत की सतर्कता पर जोर देते हुए कहा कि अदालतें अब अधिक सावधानी बरतती हैं। सितंबर 2018 में, सुप्रीम कोर्ट ने 10 से 50 वर्ष की महिलाओं के सबरीमला मंदिर में प्रवेश पर लगे प्रतिबंध को असंवैधानिक करार दिया था। इस मुद्दे पर अदालत ने विभिन्न धर्मों में महिलाओं के साथ भेदभाव और धार्मिक स्वतंत्रता के व्यापक सवाल तय किए हैं।
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इस सुनवाई का परिणाम सबरीमला मंदिर की परंपराओं और धार्मिक स्वतंत्रता पर व्यापक प्रभाव डाल सकता है।
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