दिल्ली हाई कोर्ट ने बार काउंसिल चुनाव में जूनियर वकीलों के लिए आरक्षण की मांग खारिज की
बार काउंसिल चुनाव में जूनियर वकीलों को 100% आरक्षण की मांग ठुकराई, दिल्ली HC का हस्तक्षेप से इन्कार
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दिल्ली हाई कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ दिल्ली के चुनावों में 10 साल से कम अनुभव वाले वकीलों के लिए आरक्षण की मांग को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि 100 प्रतिशत आरक्षण की अनुमति नहीं है, क्योंकि यह सभी पदों के लिए आरक्षण करने जैसा होगा।
- 01दिल्ली हाई कोर्ट ने 10 साल से कम अनुभव वाले वकीलों के लिए आरक्षण की मांग को खारिज किया।
- 02कोर्ट ने कहा कि सभी पदों के लिए 100 प्रतिशत आरक्षण की अनुमति नहीं है।
- 03बीसीडी चुनाव में 23 सदस्य पदों में से 12 सीटें अनुभवी वकीलों के लिए आरक्षित हैं।
- 04महिला वकीलों के लिए 5 सीटें आरक्षित हैं।
- 05अपीलकर्ता के पास आरक्षण मांगने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है।
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दिल्ली हाई कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ दिल्ली (बीसीडी) के चुनावों में 10 साल से कम अनुभव वाले वकीलों के लिए आरक्षण की मांग करने वाली याचिका को खारिज कर दिया। मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की पीठ ने कहा कि 100 प्रतिशत आरक्षण की अनुमति नहीं है, क्योंकि यह सभी पदों के लिए आरक्षण करने जैसा होगा। बीसीडी में कुल 23 सदस्य पद हैं, जिनमें से 12 सीटें 10 साल से अधिक अनुभव वाले वकीलों के लिए आरक्षित हैं और 5 सीटें महिला वकीलों के लिए हैं। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अपीलकर्ता के पास 10 साल से कम अनुभव वाले वकीलों के लिए बाकी सीटों में आरक्षण मांगने का कोई अधिकार नहीं है, और यह एडवोकेट्स अधिनियम या संविधान के दायरे में नहीं आता।
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इस निर्णय से जूनियर वकीलों को बीसीडी चुनाव में भागीदारी करने में कठिनाई होगी, जिससे उनके लिए प्रतिनिधित्व की संभावनाएँ सीमित हो जाएँगी।
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