शिमला में एचपीवी टीकाकरण अभियान में कमी, स्कूलों में जागरूकता बढ़ाने की कोशिश
Shimla News: एचपीवी टीकाकरण के लिए नहीं आ रही बच्चियां, विभाग ने उतारी टीमें
Amar Ujala
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शिमला जिले में एचपीवी टीकाकरण अभियान में अब तक केवल 871 बच्चियों का टीकाकरण हुआ है। स्वास्थ्य विभाग ने जागरूकता बढ़ाने के लिए स्कूलों में कैंप लगाने का निर्णय लिया है, ताकि सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए बच्चियों को टीका लगाया जा सके।
- 01871 बच्चियों का एचपीवी टीकाकरण हुआ है।
- 02सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए टीकाकरण की आवश्यकता है।
- 03स्वास्थ्य विभाग स्कूलों में जागरूकता कार्यक्रम चला रहा है।
- 04टीका बाजार में 4000-5000 रुपये में उपलब्ध है, जबकि सरकारी अस्पतालों में मुफ्त है।
- 05टीके की एक्युरेसी 83% है।
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शिमला जिले में एचपीवी (ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) टीकाकरण अभियान में अब तक केवल 871 बच्चियों का टीकाकरण किया गया है, जबकि तीन सेशन पहले ही हो चुके हैं। जिला स्वास्थ्य विभाग ने बच्चियों में जागरूकता की कमी को देखते हुए स्कूलों में टीकाकरण कैंप लगाने का निर्णय लिया है। यह टीकाकरण सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए आवश्यक है, क्योंकि महिलाओं में कैंसर से होने वाली मौतों का दूसरा बड़ा कारण बच्चेदानी के मुंह का कैंसर है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, सर्वाइकल कैंसर के 99.7% मामले उच्च जोखिम वाले एचपीवी प्रकारों के संक्रमण के कारण होते हैं। टीका बाजार में 4000 से 5000 रुपये में उपलब्ध है, लेकिन सरकारी अस्पतालों में इसे मुफ्त में लगाया जा रहा है। टीके की एक्युरेसी 83% है और इसके लगने से एंटी बॉडी बननी शुरू हो जाती है। स्वास्थ्य विभाग ने आशा वर्करों की टीम को जागरूकता कार्यक्रम में लगाया है, ताकि अधिक से अधिक बच्चियों को टीका लग सके।
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यह टीकाकरण अभियान बच्चियों को सर्वाइकल कैंसर से बचाने में मदद करेगा, जिससे उनके स्वास्थ्य में सुधार होगा।
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