धार में फर्जी जाति प्रमाण पत्र मामले में अदालत ने खारिज किया परिवाद
Dhar News: कथित फर्जी जाति प्रमाण पत्र मामले में परिवाद खारिज, कोर्ट ने नहीं पाया आपराधिक आधार
Amar Ujala
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धार, मध्य प्रदेश में नगर परिषद चुनाव से जुड़े कथित फर्जी जाति प्रमाण पत्र मामले में अदालत ने परिवादी का परिवाद खारिज कर दिया। न्यायालय ने पर्याप्त आपराधिक आधार न मिलने के कारण भारतीय दंड संहिता की धाराओं के तहत संज्ञान लेने से इंकार किया।
- 01अदालत ने फर्जी जाति प्रमाण पत्र मामले में परिवाद खारिज किया।
- 02न्यायालय ने पर्याप्त आपराधिक आधार न मिलने की बात कही।
- 03प्रवक्ता ने कहा कि मौखिक साक्ष्य पर फर्जी प्रमाण पत्र नहीं घोषित किया जा सकता।
- 04अधिकारी या राज्य स्तरीय समिति द्वारा जांच आवश्यक है।
- 05अपर न्यायालय में रिवीजन की योजना बनाई जा रही है।
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धार, मध्य प्रदेश में नगर परिषद चुनाव से जुड़े कथित फर्जी जाति प्रमाण पत्र मामले में न्यायालय ने परिवादी अंजली अजय जायसवाल द्वारा दायर परिवाद को खारिज कर दिया है। न्यायालय ने कहा कि प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर किसी भी आपराधिक धाराओं के तहत संज्ञान लेने के लिए पर्याप्त आधार नहीं हैं। अधिवक्ता दिनेश बैरागी ने बताया कि केवल मौखिक साक्ष्य या प्रारंभिक जांच के आधार पर किसी जाति प्रमाण पत्र को फर्जी नहीं घोषित किया जा सकता। इसके लिए सक्षम प्राधिकारी या राज्य स्तरीय जाति सत्यापन समिति द्वारा विधिवत जांच आवश्यक है। अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धाराओं 420, 467, 468, 471 के अंतर्गत संज्ञान लेने से इंकार करते हुए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 203 के तहत परिवाद को निराधार मानकर खारिज कर दिया। इस मामले में एड्वोकेट दिलीप चौहान ने कहा कि न्यायालय के आदेश से असंतुष्ट होकर अपर न्यायालय में रिवीजन पेश किया जाएगा।
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यह निर्णय स्थानीय राजनीति और चुनाव प्रक्रिया पर प्रभाव डाल सकता है, विशेषकर जाति प्रमाण पत्र के उपयोग में पारदर्शिता को बढ़ावा देने में।
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