सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई: क्या ट्रायल में देरी पर मिल सकती है जमानत?
क्या ट्रायल में देरी पर अजमल कसाब या हाफिज सईद को भी मिल सकती है बेल? SC के फैसले पर दिल्ली पुलिस का सवाल

Image: Jagran
दिल्ली दंगे मामले में तस्लीम अहमद और खालिद सैफी की जमानत याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। दिल्ली पुलिस ने सवाल उठाया कि क्या ट्रायल में देरी के आधार पर जमानत दी जा सकती है। अदालत ने इस मुद्दे पर फैसला सुरक्षित रखा है, जबकि बचाव पक्ष ने समानता के आधार पर राहत की मांग की है।
- 01दिल्ली पुलिस ने ट्रायल में देरी को जमानत का आधार मानने पर आपत्ति जताई।
- 02अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने अजमल कसाब और हाफिज सईद के उदाहरण दिए।
- 03बचाव पक्ष ने समानता के आधार पर राहत की मांग की, यह कहते हुए कि अन्य आरोपियों को पहले ही जमानत मिल चुकी है।
- 04सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आदेश सुरक्षित रखा।
- 05अदालत ने संकेत दिया कि याचिकाकर्ताओं को अंतरिम राहत मिल सकती है।
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दिल्ली दंगे की बड़ी साजिश मामले में तस्लीम अहमद और खालिद सैफी की जमानत याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान, दिल्ली पुलिस ने सवाल उठाया कि क्या केवल ट्रायल में देरी के आधार पर किसी भी आरोपी को जमानत दी जा सकती है। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने इस मुद्दे पर गंभीरता से चर्चा की और अजमल कसाब और हाफिज सईद के मामलों का उदाहरण दिया, यह बताते हुए कि यदि ट्रायल में देरी आरोपी की वजह से हो, तो क्या उन्हें जमानत दी जा सकती है। उन्होंने कहा कि यूएपीए की धारा 43D(5) के तहत जमानत के लिए कड़े प्रावधान हैं और हर मामले में आरोपी की भूमिका और अपराध की गंभीरता को देखना आवश्यक है। बचाव पक्ष ने समानता के आधार पर राहत की मांग की, यह कहते हुए कि अन्य आरोपियों को पहले ही जमानत मिल चुकी है। सुप्रीम कोर्ट ने सभी दलीलें सुनने के बाद आदेश सुरक्षित रखा और संकेत दिया कि याचिकाकर्ताओं को अंतरिम राहत मिल सकती है।
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इस मामले का फैसला दिल्ली दंगों से जुड़े आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर प्रभाव डालेगा, जिससे अन्य मामलों में समानता का मुद्दा भी उठ सकता है।
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