भारत की NEET और चीन की Gaokao: परीक्षा प्रणाली की तुलना
India' NEET vs China's Gaokao : 25 लाख छात्र बनाम 1.3 करोड़ छात्र, फिर भी चीन में पेपर लीक क्यों नहीं?
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भारत में NEET परीक्षा हर साल 20 से 25 लाख छात्रों द्वारा दी जाती है, जबकि चीन की Gaokao परीक्षा में 1.3 करोड़ छात्र शामिल होते हैं। चीन में पेपर लीक के मामले कम होने का कारण वहां की सख्त परीक्षा प्रणाली और तकनीकी निगरानी है।
- 01NEET परीक्षा में हर साल 20-25 लाख छात्र शामिल होते हैं।
- 02Gaokao परीक्षा में लगभग 1.3 करोड़ छात्र भाग लेते हैं।
- 03चीन में परीक्षा की निगरानी के लिए हाईटेक उपायों का इस्तेमाल किया जाता है।
- 04भारत में NEET का जिम्मा NTA जैसी एजेंसियों पर होता है।
- 05दोनों देशों की परीक्षा प्रणाली में महत्वपूर्ण अंतर हैं।
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भारत में NEET (National Eligibility cum Entrance Test) परीक्षा हर साल 20 से 25 लाख छात्रों द्वारा दी जाती है, जो मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए आवश्यक है। इसके विपरीत, चीन की Gaokao परीक्षा में लगभग 1.3 करोड़ छात्र भाग लेते हैं, जो न केवल मेडिकल, बल्कि अन्य कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के लिए भी आवश्यक है। चीन में परीक्षा के दौरान ड्रोन मॉनिटरिंग, AI सर्विलांस, बायोमेट्रिक जांच और इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल ब्लॉकर्स का उपयोग किया जाता है, जिससे पेपर लीक जैसी घटनाएं कम होती हैं। चीन में गाओकाओ को शिक्षा का एक महत्वपूर्ण अवसर माना जाता है, जिसके लिए परिवार सालों तक तैयारी करते हैं। जबकि भारत में NEET और अन्य परीक्षाओं की जिम्मेदारी NTA (National Testing Agency) जैसी एजेंसियों पर होती है। दोनों देशों की परीक्षा प्रणाली में सुरक्षा और निगरानी के तरीके में महत्वपूर्ण अंतर हैं, जो इन परीक्षाओं की विश्वसनीयता को प्रभावित करते हैं।
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NEET परीक्षा में पेपर लीक की घटनाएं छात्रों के भविष्य को प्रभावित कर सकती हैं, जबकि Gaokao की सख्त प्रणाली छात्रों को बेहतर अवसर प्रदान करती है।
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