सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली बार काउंसिल चुनाव की मतगणना पर रोक हटाने से किया इनकार
दिल्ली बार काउंसिल चुनाव: मतगणना पर लगी रोक हटाने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, प्रत्याशियों को लगा बड़ा झटका

Image: Jagran
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली बार काउंसिल चुनाव की वोटों की गिनती पर रोक हटाने की याचिका को खारिज कर दिया। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि मतपत्रों में छेड़छाड़ के आरोप गंभीर हैं, और मामले को दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई के लिए भेजा गया है।
- 01सुप्रीम कोर्ट ने 18 मई के अपने आदेश को संशोधित करने से इनकार किया, जिसमें वोटों की गिनती पर रोक लगाई गई थी।
- 02सीजेआई सूर्यकांत ने मतपत्रों में छेड़छाड़ के आरोपों का उल्लेख किया।
- 03वोटों की गिनती पर रोक हटाने के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने आवेदन किया था।
- 04दिल्ली हाई कोर्ट से मामले की सुनवाई 25 मई को करने का आदेश दिया गया है।
- 05सुप्रीम कोर्ट ने वसीयत के मामले में भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की, जिसमें कहा गया कि स्वाभाविक वारिसों को बाहर करना वसीयत को अमान्य नहीं करता।
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सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को दिल्ली बार काउंसिल (बीसीडी) चुनाव की वोटों की गिनती पर रोक लगाने के अपने पहले के आदेश को संशोधित करने से इनकार कर दिया। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह के आग्रह को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि मतगणना चल रही है और इसे पूरा होने दिया जाए। सीजेआई ने मतपत्रों में छेड़छाड़ के आरोपों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह एक गंभीर मुद्दा है। इसके बाद, पीठ ने मामले को दिल्ली हाई कोर्ट में 25 मई को सुनवाई के लिए भेजने का आदेश दिया। इस बीच, सुप्रीम कोर्ट ने एक वसीयत के मामले में भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की, जिसमें कहा गया कि केवल स्वाभाविक वारिसों को विरासत से बाहर करना वसीयत को अमान्य करने के लिए पर्याप्त नहीं है।
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इस निर्णय से बार काउंसिल चुनाव में भाग लेने वाले प्रत्याशियों को बड़ा झटका लगा है।
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