डोनाल्ड ट्रंप का ईरान के साथ परमाणु समझौता तोड़ने का फैसला
ईरान के साथ वह समझौता जिसे राष्ट्रपति बनते ही ट्रंप ने तोड़ दिया था
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ युद्धविराम को अनिश्चितकाल के लिए बढ़ा दिया, जबकि ईरान ने अपने बंदरगाहों की नाकेबंदी को युद्धविराम का उल्लंघन बताया। ईरान का परमाणु कार्यक्रम और अमेरिका के साथ उसके संबंधों पर यह स्थिति गंभीर प्रभाव डाल सकती है।
- 01डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ युद्धविराम को बढ़ाया।
- 02ईरान ने अपने बंदरगाहों की नाकेबंदी को युद्ध का उल्लंघन बताया।
- 03ईरान का परमाणु कार्यक्रम 2003 से चल रहा है।
- 042015 में ईरान और अमेरिका के बीच एक परमाणु समझौता हुआ था।
- 05ट्रंप ने मई 2018 में अमेरिका को इस समझौते से बाहर निकाल दिया।
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में ईरान के साथ जारी युद्धविराम को अनिश्चितकाल के लिए बढ़ा दिया है। यह घोषणा उन्होंने सोशल मीडिया पर की, जबकि ईरान ने अपने बंदरगाहों की नाकेबंदी को युद्ध का उल्लंघन बताते हुए वार्ता में भाग लेने से इनकार कर दिया। ईरान का परमाणु कार्यक्रम 2003 से चल रहा है, जब संयुक्त राष्ट्र परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने इसकी जानकारी दी थी। ईरान ने हमेशा कहा है कि उसका कार्यक्रम शांतिपूर्ण है, लेकिन अमेरिका को संदेह है कि ईरान परमाणु हथियार बनाने की कोशिश कर रहा है। 2015 में ईरान और अमेरिका के बीच एक महत्वपूर्ण परमाणु समझौता हुआ, जिसमें ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने पर सहमति जताई थी। हालांकि, ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद अमेरिका ने मई 2018 में इस समझौते से बाहर निकलने का निर्णय लिया। इसके बाद ईरान ने यूरेनियम संवर्धन को बढ़ा दिया, जो अब 60 प्रतिशत से अधिक हो गया है।
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इस स्थिति का असर ईरान और अमेरिका के बीच तनाव को बढ़ा सकता है, जिससे क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति और भी जटिल हो जाएगी।
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