गोरखपुर मॉडल से इंसेफेलाइटिस पर नियंत्रण: इस साल नहीं हुई एक भी मौत
UP: इंसेफेलाइटिस पर बड़ी जीत, इस साल नहीं हुई एक भी मौत, गोरखपुर की ये पद्धति बनी 'रामबाण'; जानें पूरी डिटेल
Amar Ujala
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गोरखपुर, उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग ने एईएस और जेई पर नियंत्रण के लिए एक सफल मॉडल लागू किया है, जिसके परिणामस्वरूप इस वर्ष एक भी मौत नहीं हुई। 12 विभागों की संयुक्त टीम ने स्कूलों में स्वास्थ्य इंस्ट्रक्टर नियुक्त किए और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर उपचार सुविधाएं बढ़ाई हैं।
- 01गोरखपुर में एईएस और जेई पर नियंत्रण के लिए नया मॉडल सफल रहा है।
- 02इस वर्ष गोरखपुर मंडल में इंसेफेलाइटिस से एक भी मौत नहीं हुई।
- 03स्वास्थ्य विभाग ने 12 विभागों की संयुक्त टीम बनाई है।
- 04स्कूलों में स्वास्थ्य इंस्ट्रक्टरों को प्रशिक्षित किया गया है।
- 05बीमारियों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए अभियान चलाए जा रहे हैं।
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गोरखपुर, उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग ने एईएस (एक्यूट एन्सेफलाइटिस सिंड्रोम) और जेई (जापानी एन्सेफलाइटिस) पर नियंत्रण के लिए एक प्रभावी मॉडल विकसित किया है। इस मॉडल के तहत, पहले मरीजों को सीधे बीआरडी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर भेजा जाता था, जिससे कई मरीज रास्ते में ही दम तोड़ देते थे। अब, स्वास्थ्य विभाग ने 12 विभिन्न विभागों की एक संयुक्त टीम बनाई है, जिसमें पंचायत और नगर निगम भी शामिल हैं। स्कूलों में प्रत्येक शिक्षक को हेल्थ इंस्ट्रक्टर के रूप में प्रशिक्षित किया गया है ताकि बुखार वाले बच्चों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया जा सके। इस पहल के परिणामस्वरूप, गोरखपुर मंडल में इस वर्ष एईएस और जेई से एक भी मौत नहीं हुई है। इसके अलावा, स्वास्थ्य विभाग ने अन्य संक्रामक बीमारियों पर नियंत्रण के लिए भी अभियान शुरू किए हैं, जिसमें टीबी, मलेरिया और कुष्ठ जैसी बीमारियों का भी समावेश है। अपर मुख्य सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अमित कुमार घोष ने बताया कि समय पर उपचार शुरू करने से मरीज गंभीर स्थिति में नहीं पहुंचते हैं।
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गोरखपुर में इस मॉडल के सफल कार्यान्वयन से न केवल इंसेफेलाइटिस पर नियंत्रण पाया गया है, बल्कि अन्य संक्रामक बीमारियों के प्रति भी जागरूकता बढ़ी है।
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