सूर्य की ज्योतिषीय स्थिति और उसके प्रभाव
ज्योतिषशास्त्र में सूर्य की स्थिति का कैसा होता है प्रभाव
Nbt NavbharattimesImage: Nbt Navbharattimes
ज्योतिषशास्त्र में सूर्य को ग्रहों का राजा माना गया है। यह जातक के जीवन पर सकारात्मक या नकारात्मक प्रभाव डालता है। सूर्य की स्थिति से स्वास्थ्य, करियर और पारिवारिक संबंध प्रभावित होते हैं।
- 01सूर्य का जन्म अदिति के गर्भ से हुआ, जिसे वेदों में आदित्य कहा गया है।
- 02जिनकी जन्मपत्री में प्रबल सूर्य होता है, उन्हें पिता से विशेष लाभ मिलता है।
- 03सूर्य के कुप्रभाव से हृदय रोग, सिर एवं नेत्र रोग जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
- 04सूर्य की महादशा में धैर्यपूर्वक रहना और दुर्व्यसनों से दूर रहना लाभकारी होता है।
- 05सूर्य के प्रभाव को संतुलित करने के लिए पितृ पूजा और माणिक्य रत्न का उपयोग किया जाता है।
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भारतीय ज्योतिष में सूर्य को ग्रहों का राजा माना जाता है, जो जातक के जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अदिति के गर्भ से जन्मे सूर्य को वेदों में आदित्य कहा गया है। सूर्य की स्थिति से जातक के स्वास्थ्य, करियर और पारिवारिक संबंध प्रभावित होते हैं। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, यदि किसी की जन्मपत्री में सूर्य प्रभावहीन है, तो उसे मंदाग्नि, रक्तचाप और बुखार जैसी बीमारियों का सामना करना पड़ सकता है। इसके विपरीत, प्रबल सूर्य वाले जातक को पिता से विशेष लाभ प्राप्त होता है। ऐसे जातक सरकारी नौकरी और प्रशासनिक क्षेत्र में सफलता प्राप्त कर सकते हैं। सूर्य के कुप्रभाव से हृदय रोग, सिर एवं नेत्र रोग जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं। सूर्य के प्रभाव को संतुलित करने के लिए ज्योतिषी पितृ पूजा, श्राद्ध कर्म और माणिक्य रत्न का उपयोग करने की सलाह देते हैं। सूर्य की महादशा में धैर्य और ईमानदारी से रहना लाभकारी होता है।
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सूर्य की स्थिति से जातकों के स्वास्थ्य और करियर पर प्रभाव पड़ता है।
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