हाईकोर्ट ने 15 साल जेल में बिताने के बाद आरोपी को दी जमानत
स्वतंत्रता वास्तविक सांविधानिक अधिकार: सजा रद्द होने के बावजूद 15 साल जेल में रहा, हाईकोर्ट ने दी जमानत
Amar Ujala
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पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने 15 साल से अधिक समय तक जेल में बंद एक आरोपी को जमानत दी है, जबकि उसकी दोषसिद्धि सुप्रीम कोर्ट द्वारा रद्द की जा चुकी थी। कोर्ट ने कहा कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता एक वास्तविक सांविधानिक अधिकार है और बिना वैध दोषसिद्धि के किसी को जेल में रखना न्याय के खिलाफ है।
- 01हाई कोर्ट ने 15 साल जेल में बिताने के बाद आरोपी को जमानत दी।
- 02सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी की दोषसिद्धि को रद्द किया था।
- 03कोर्ट ने कहा कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता एक वास्तविक सांविधानिक अधिकार है।
- 04बिना वैध दोषसिद्धि के जेल में रखना न्याय के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है।
- 05लंबी हिरासत मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।
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पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने एक आरोपी को जमानत दी है, जो 15 साल से अधिक समय तक जेल में रहा, जबकि उसकी दोषसिद्धि सुप्रीम कोर्ट द्वारा रद्द की जा चुकी थी। कोर्ट ने कहा कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता केवल एक दिखावटी अवधारणा नहीं है, बल्कि यह एक वास्तविक सांविधानिक अधिकार है। बिना वैध दोषसिद्धि के किसी व्यक्ति को जेल में रखना न्याय के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है। अदालत ने यह भी कहा कि लंबे समय तक हिरासत में रखना व्यक्ति के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। कोर्ट ने चिंता जताई कि प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रियाओं में उलझे रहने के कारण आरोपी को अनिश्चितकाल तक हिरासत में नहीं रखा जा सकता।
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इस निर्णय से न्यायिक प्रणाली में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया गया है और यह सुनिश्चित किया गया है कि बिना वैध दोषसिद्धि के किसी को भी जेल में नहीं रखा जा सकता।
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