तांदुला नदी के कायाकल्प के लिए IIT भिलाई और बालोद प्रशासन का ऐतिहासिक समझौता
नदी की गंदगी अब बनेगी कमाई का जरिया! जानिए कैसे IIT भिलाई बदलने जा रहा है तांदुला की तस्वीर
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छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में तांदुला नदी के पुनर्जीवन के लिए IIT भिलाई और जिला प्रशासन ने एक समझौता किया है। यह परियोजना न केवल नदी की सफाई पर केंद्रित है, बल्कि इसे एक इको-टूरिज्म कॉरिडोर में भी विकसित किया जाएगा।
- 01IIT भिलाई और बालोद जिला प्रशासन के बीच तांदुला नदी के पुनर्जीवन के लिए समझौता हुआ।
- 02परियोजना में नदी के तीन किलोमीटर हिस्से का विकास किया जाएगा।
- 03उन्नत तकनीकी सर्वेक्षण और जैव विविधता के संरक्षण पर ध्यान दिया जाएगा।
- 04तांदुला नदी को इको-टूरिज्म कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जाएगा।
- 05यह मॉडल छत्तीसगढ़ की अन्य नदियों के लिए भी एक उदाहरण बनेगा।
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तांदुला नदी, जो बालोद जिले की पहचान और किसानों की जीवनदायिनी मानी जाती है, अब एक नई दिशा में बढ़ने जा रही है। IIT भिलाई और बालोद जिला प्रशासन ने तांदुला नदी के पुनर्जीवन के लिए एक ऐतिहासिक समझौता किया है। इस परियोजना का उद्देश्य नदी को केवल साफ करना नहीं, बल्कि इसे एक वैज्ञानिक मॉडल के रूप में पुनर्जीवित करना है। कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा के नेतृत्व में, पहले चरण में तांदुला जलाशय से हीरापुर एनीकट तक के 3 किलोमीटर के हिस्से का विकास किया जाएगा। इस महायज्ञ में तीन प्रमुख कदम उठाए जाएंगे: पहले, जल की गुणवत्ता में सुधार के लिए उन्नत तकनीकी सर्वेक्षण किया जाएगा; दूसरे, जैव विविधता के संरक्षण के लिए प्रकृति-आधारित समाधानों का उपयोग किया जाएगा; और तीसरे, जलकुंभियों को संसाधन के रूप में उपयोग किया जाएगा। दुर्ग संभाग के आयुक्त सत्य नारायण राठौर ने इसे छत्तीसगढ़ के लिए एक पथ-प्रदर्शक परियोजना बताया है, जो भविष्य में अन्य नदियों के लिए भी एक उदाहरण बनेगा।
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इस परियोजना से स्थानीय पर्यटकों को आकर्षित करने और नदी के प्रदूषण को कम करने में मदद मिलेगी।
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