कराची यूनिवर्सिटी में शिक्षकों का परीक्षा बहिष्कार, महंगाई और वेतन न मिलने से उत्पन्न संकट
महंगाई से पाकिस्तान बेहाल: सैलरी न मिलने पर कराची यूनिवर्सिटी में परीक्षाओं का बहिष्कार
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पाकिस्तान में आर्थिक संकट के कारण कराची यूनिवर्सिटी के शिक्षकों ने सेमेस्टर परीक्षाओं का बहिष्कार किया है। शिक्षकों को लंबे समय से वेतन और भत्ते नहीं मिले हैं, जिससे उनकी वित्तीय स्थिति गंभीर हो गई है। यह कदम प्रशासन की उदासीनता के खिलाफ उठाया गया है।
- 01कराची यूनिवर्सिटी के शिक्षकों ने परीक्षा बहिष्कार का निर्णय लिया।
- 02शिक्षकों को लंबे समय से वेतन और भत्ते नहीं मिले हैं।
- 03महंगाई ने शिक्षकों की वित्तीय स्थिति को गंभीर रूप से प्रभावित किया है।
- 04शिक्षकों ने मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग की है।
- 05शिक्षकों का आंदोलन छात्रों के भविष्य को प्रभावित कर सकता है।
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पाकिस्तान में आर्थिक संकट ने कराची यूनिवर्सिटी (KU) के शिक्षकों को सेमेस्टर परीक्षाओं का बहिष्कार करने के लिए मजबूर कर दिया है। शिक्षकों ने अपने वित्तीय मुद्दों को सुलझाने में प्रशासन की विफलता के खिलाफ यह कदम उठाया है। कराची यूनिवर्सिटी टीचर्स सोसाइटी (KUTS) के अध्यक्ष गुफरान आलम ने बताया कि शिक्षकों को लंबे समय से मूल वेतन, शाम के सत्रों और आवास भत्ते का भुगतान नहीं किया गया है, जिससे कई शिक्षक आर्थिक बर्बादी के कगार पर पहुँच गए हैं। हाल ही में ईंधन की कीमतों में अभूतपूर्व वृद्धि ने उनकी वित्तीय समस्याओं को और बढ़ा दिया है। शिक्षकों ने मुख्यमंत्री मुराद अली शाह से 1.3 अरब PKR के घाटे की जांच की मांग की है, ताकि पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके। हजारों छात्रों का शैक्षणिक भविष्य दांव पर है, लेकिन शिक्षक अपने रुख पर अडिग हैं और प्रशासन के खिलाफ यह आंदोलन जारी रखने का निर्णय लिया है।
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शिक्षकों के इस बहिष्कार के कारण छात्रों की परीक्षाएँ प्रभावित हो रही हैं, जिससे उनकी शैक्षणिक प्रगति रुक सकती है।
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