भारत की शिक्षा व्यवस्था की बदहाली: नीति आयोग की रिपोर्ट में चौंकाने वाले तथ्य
'पढ़ेगा इंडिया तभी तो बढ़ेगा इंडिया' लेकिन कैसे? कहीं 1 शिक्षक के भरोसे पढ़ाई तो कहीं पानी-बिजली की किल्लत!
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नीति आयोग की नई रिपोर्ट में भारत के सरकारी स्कूलों की स्थिति चिंताजनक बताई गई है। हजारों स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी है, जबकि 1 लाख से अधिक स्कूल केवल एक शिक्षक पर निर्भर हैं। ड्रॉपआउट दर में वृद्धि और शिक्षा की गुणवत्ता में गिरावट भी गंभीर मुद्दे हैं।
- 0198,500 स्कूलों में लड़कियों के लिए टॉयलेट नहीं हैं।
- 021 लाख से अधिक स्कूल केवल एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं।
- 03बिहार, झारखंड और मध्य प्रदेश में शिक्षक पदों की कमी।
- 04ड्रॉपआउट दर कई राज्यों में राष्ट्रीय औसत से अधिक है।
- 05भारत का शिक्षा बजट GDP का केवल 4.6 प्रतिशत है।
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नीति आयोग की नई रिपोर्ट ने भारत की शिक्षा व्यवस्था की गंभीर स्थिति को उजागर किया है। रिपोर्ट के अनुसार, देश के 98,500 स्कूलों में लड़कियों के लिए काम करने वाले टॉयलेट नहीं हैं, और 1.19 लाख स्कूल अब भी बिजली की सुविधा से वंचित हैं। इसके अलावा, 1 लाख से अधिक स्कूल केवल एक शिक्षक पर निर्भर हैं, जो मुख्यतः ग्रामीण इलाकों में हैं। बिहार, झारखंड और मध्य प्रदेश में शिक्षक पदों की कमी सबसे अधिक देखी गई है। झारखंड में छात्र-शिक्षक अनुपात 47:1 है, जो आदर्श अनुपात से कहीं अधिक है। रिपोर्ट में ड्रॉपआउट दर में वृद्धि को भी चिंता का विषय बताया गया है, खासकर पश्चिम बंगाल, अरुणाचल प्रदेश, कर्नाटक और असम में। भारत का शिक्षा पर खर्च GDP का केवल 4.6 प्रतिशत है, जो अन्य देशों की तुलना में कम है।
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इस रिपोर्ट से यह स्पष्ट होता है कि शिक्षा की बुनियादी सुविधाओं की कमी और शिक्षक की अनुपलब्धता से छात्रों की शिक्षा पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
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