डीएसजीएमसी ने सरना बंधुओं और जीके की सदस्यता रद की
भ्रष्टाचार के मामले पर DSGMC का बड़ा एक्शन, दूसरी बार रद हुई सरना बंधुओं और जीके की सदस्यता
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दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (डीएसजीएमसी) ने पूर्व अध्यक्ष परमजीत सिंह सरना, हरविंदर सिंह सरना और मनजीत सिंह जीके की सदस्यता दूसरी बार रद करने का प्रस्ताव पारित किया। यह निर्णय भ्रष्टाचार की शिकायतों के आधार पर लिया गया है।
- 01डीएसजीएमसी ने सरना बंधुओं और जीके की सदस्यता रद की।
- 02भ्रष्टाचार की शिकायतों के आधार पर प्रस्ताव पारित किया गया।
- 03पिछले वर्ष भी इसी प्रकार का प्रस्ताव पारित किया गया था।
- 04बैठक में 50 में से 38 सदस्य उपस्थित थे।
- 05जीके पर एफआइआर दर्ज है और उन्हें देश से बाहर जाने की अनुमति नहीं है।
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दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (डीएसजीएमसी) ने अपनी जनरल हाउस बैठक में पूर्व अध्यक्ष परमजीत सिंह सरना, हरविंदर सिंह सरना और मनजीत सिंह जीके की सदस्यता को दूसरी बार रद करने का प्रस्ताव पारित किया। अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका ने बताया कि इन तीनों के खिलाफ अध्यक्ष रहते हुए भ्रष्टाचार की शिकायतें आई थीं। पिछले वर्ष 25 अक्टूबर को भी इसी तरह का प्रस्ताव पारित किया गया था। श्री अकाल तख्त के निर्देश पर बैठक बुलाई गई थी, जिसमें सभी सदस्यों को 15 दिन पहले सूचित किया गया था। बैठक में 50 में से 38 सदस्य उपस्थित थे और सर्वसम्मति से सदस्यता समाप्त करने का प्रस्ताव पास किया गया। महासचिव जगदीप सिंह काहलों ने आरोप लगाया कि सरना बंधुओं ने गुरु के गोलक का दुरुपयोग किया और जीके पर एफआइआर दर्ज है। जीके ने बैठक को अवैध बताया और कहा कि डीएसजीएमसी का कार्यकाल समाप्त हो गया है।
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इस निर्णय का प्रभाव सिख समुदाय में प्रशासनिक पारदर्शिता और भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई के रूप में देखा जा सकता है।
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