तमिलनाडु में एमके स्टालिन की हार: वीएस बाबू बने नए धुरंधर
DMK के कभी 'वफादार' रहे वीएस बाबू कौन? कोलाथुर से एमके स्टालिन को हराकर बने तमिलनाडु के सबसे बड़े 'धुरंधर'
Nbt NavbharattimesImage: Nbt Navbharattimes
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन को कोलाथुर विधानसभा सीट पर टीवीके के उम्मीदवार वीएस बाबू ने हराया। वीएस बाबू, जो पहले स्टालिन के वफादार थे, ने चुनाव में अपनी राजनीतिक समझदारी का परिचय दिया। यह हार डीएमके के लिए एक बड़ा झटका है।
- 01एमके स्टालिन को कोलाथुर विधानसभा सीट पर हार का सामना करना पड़ा।
- 02वीएस बाबू ने पहले डीएमके में काम किया था और अब टीवीके के उम्मीदवार हैं।
- 03वीएस बाबू की राजनीतिक समझदारी ने उन्हें जीत दिलाई।
- 04स्टालिन की हार से डीएमके को बड़ा झटका लगा है।
- 05कोलाथुर सीट पर स्टालिन का 15 साल का शासन समाप्त हुआ।
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तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन को कोलाथुर विधानसभा सीट पर वीएस बाबू ने हराया है। यह हार स्टालिन के लिए एक बड़ा झटका है, क्योंकि वह पिछले 15 वर्षों से इस सीट पर काबिज थे। वीएस बाबू, जो पहले डीएमके के वफादार थे, ने हाल ही में टीवीके में शामिल होकर इस चुनाव में अपनी राजनीतिक समझदारी का प्रदर्शन किया। उन्होंने 2021 के विधानसभा चुनाव में 60% से अधिक वोट प्राप्त किए थे, लेकिन 2025 में उनकी हार ने उनकी पार्टी को कमजोर कर दिया है। वीएस बाबू की जमीनी राजनीति पर अच्छी पकड़ है, और उनकी जीत ने तमिलनाडु की राजनीति में एक नया मोड़ लाया है।
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स्टालिन की हार से डीएमके की राजनीतिक स्थिति कमजोर हुई है, जिससे पार्टी के समर्थकों में निराशा फैल सकती है।
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