नैनीताल में वन विभाग ने ट्रैकुलाइज कर पकड़ा बाघ, आदमखोर होने की जांच जारी
नैनीताल में वन विभाग के हाथ लगी सफलता: ज्योली क्षेत्र से ट्रैकुलाइज कर पकड़ा बाघ, आदमखोर होने की जांच जारी
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नैनीताल वन प्रभाग में वन विभाग ने ज्योली क्षेत्र से एक नर बाघ को ट्रैकुलाइज कर रानीबाग रेस्क्यू सेंटर भेजा है। पिछले पांच महीनों में वन्य जीव के हमलों में छह महिलाओं की मौत हुई है, जिससे बाघ के आदमखोर होने की जांच की जा रही है।
- 01ज्योली क्षेत्र से नर बाघ को ट्रैकुलाइज किया गया है।
- 02पिछले पांच महीनों में वन्य जीव के हमलों में छह महिलाओं की मौत हुई है।
- 03बाघ के आदमखोर होने की पुष्टि डीएनए जांच के बाद होगी।
- 04वन विभाग ने अब तक छह गुलदार और दो बाघ पकड़े हैं।
- 05डॉ. हिमांशु पांगती ने 25 बाघ और 46 गुलदारों को सफलतापूर्वक रेस्क्यू किया है।
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नैनीताल वन प्रभाग में वन विभाग ने ज्योली क्षेत्र से एक नर बाघ को ट्रैकुलाइज किया है, जिसे रानीबाग रेस्क्यू सेंटर भेजा गया है। पिछले पांच महीनों में वन्य जीव के हमलों में छह महिलाओं की मौत हो चुकी है, जिसके चलते बाघ के आदमखोर होने की जांच की जा रही है। वन विभाग ने घटनास्थल के समीप ट्रेकुलाइज टीम तैनात की थी। बाघ को ट्रैकुलाइज करने के लिए 50 से अधिक ट्रेप कैमरे लगाए गए थे। डॉ. हिमांशु पांगती, जो नैनीताल चिड़ियाघर में पशु चिकित्सक हैं, ने इस बाघ को ट्रैकुलाइज किया। उन्होंने अब तक 25 बाघ और 46 गुलदार को सफलतापूर्वक रेस्क्यू किया है। बाघ के डीएनए सैंपल की जांच के बाद ही यह पुष्टि होगी कि वह आदमखोर है या नहीं। इस बीच, ग्रामीणों में चिंता बनी हुई है कि क्या अब वन्य जीव के हमलों में कमी आएगी या खतरा अब भी बरकरार है।
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इस बाघ के पकड़े जाने से स्थानीय ग्रामीणों में सुरक्षा की भावना बढ़ी है, लेकिन खतरा अभी भी बना हुआ है।
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