सिंधु जल समझौते पर भारत का कड़ा रुख, पाकिस्तान पर आरोप
सिंधु जल समझौता: पाकिस्तान ने बनाया भारत में विकास रोकने का हथियार
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भारत ने पाकिस्तान के साथ सिंधु जल समझौते को स्थगित कर दिया है, यह आरोप लगाते हुए कि पाकिस्तान ने इस समझौते का दुरुपयोग किया है। भारत का कहना है कि पाकिस्तान ने विकास परियोजनाओं को रोकने के लिए इसका इस्तेमाल किया है, जिससे भारतीय क्षेत्रों में जल संकट उत्पन्न हुआ है।
- 01भारत ने 22 अप्रैल, 2025 को सिंधु जल समझौता स्थगित किया।
- 02पाकिस्तान ने समझौते का दुरुपयोग कर भारतीय विकास परियोजनाओं को रोका।
- 03भारत ने संधि का पालन करते हुए भी पाकिस्तान पर झूठे आरोप लगाए जाने का दावा किया।
- 04संधि की पाबंदियों के कारण पंजाब और राजस्थान में जल संकट बढ़ा।
- 05भारत का कड़ा रुख अपने हितों की रक्षा के लिए आवश्यक है।
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भारत ने 22 अप्रैल, 2025 को पाकिस्तान के साथ सिंधु जल समझौते को स्थगित कर दिया, यह आरोप लगाते हुए कि पाकिस्तान ने इस समझौते का दुरुपयोग किया है। पूर्व भारतीय सिंधु जल आयुक्त प्रदीप कुमार सक्सेना के अनुसार, पाकिस्तान ने संधि के नियमों का इस्तेमाल भारत की पनबिजली परियोजनाओं को रोकने के लिए किया है। भारत ने पिछले 65 वर्षों में युद्ध के दौरान भी संधि का पालन किया है, जबकि पाकिस्तान ने इसे अपने हितों के खिलाफ उपयोग किया है। इससे राजस्थान और पंजाब के बड़े क्षेत्रों में जल संकट उत्पन्न हुआ है। भारत का मानना है कि इस संधि के कारण जम्मू-कश्मीर में भी विकास बाधित हुआ है। भारत अब इस असमान समझौते को सुधारने के लिए कड़ा रुख अपनाने का निर्णय लिया है।
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यदि भारत को सिंधु जल समझौते में आवश्यक बदलाव मिलते हैं, तो इससे जल संकट कम हो सकता है और कृषि एवं बिजली उत्पादन में सुधार हो सकता है।
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