अमेरिका की खतरनाक साजिश: मच्छरों को बनाया जैविक हथियार, कोल्ड वॉर में USSR के खिलाफ प्रयोग
बम नहीं मच्छरों को बनाया था किलर वेपन, कोल्ड वॉर में USSR के खिलाफ अमेरिका की खौफनाक साजिश; पेंटागन फाइल्स में खुलासा

Image: Zee News
अमेरिका ने कोल्ड वॉर के दौरान मच्छरों को जैविक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने के लिए 'प्रोजेक्ट बेलवेदर' नामक गुप्त कार्यक्रम चलाया। इसमें संक्रमित मच्छरों के माध्यम से दुश्मन के खिलाफ हमले की योजना बनाई गई थी।
- 01अमेरिकी सेना ने 1959 में 'प्रोजेक्ट बेलवेदर' के तहत मच्छरों को जैविक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने के लिए परीक्षण किया।
- 02एडीज एजिप्टी प्रजाति के मच्छरों को चुना गया, जो डेंगू और जीका जैसे रोग फैलाते हैं।
- 03'ऑपरेशन ड्रॉप किक' और 'ऑपरेशन बिग बज' जैसे अन्य कार्यक्रमों में भी मच्छरों का प्रयोग किया गया।
- 04मच्छरों को बिना सीधे संक्रमित किए घातक वायरस लोड करने की योजना बनाई गई।
- 05सोवियत संघ ने 1982 में अमेरिका के इस कार्यक्रम पर जांच रिपोर्ट प्रकाशित की।
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अमेरिका ने कोल्ड वॉर के दौरान एक गुप्त कार्यक्रम 'प्रोजेक्ट बेलवेदर' चलाया, जिसमें मच्छरों को जैविक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने का परीक्षण किया गया। यह कार्यक्रम 1959 में शुरू हुआ और इसका उद्देश्य यह पता लगाना था कि क्या मच्छरों को दुश्मन के खिलाफ एक घातक हथियार के रूप में छोड़ा जा सकता है। अमेरिकी सेना ने विशेष रूप से एडीज एजिप्टी प्रजाति के मच्छरों का चयन किया, जो कई जानलेवा बीमारियों के वाहक होते हैं। रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि इस प्रकार के जैविक हमले पारंपरिक बमों की तुलना में अधिक प्रभावी हो सकते हैं। इसके अंतर्गत 'ऑपरेशन ड्रॉप किक' और 'ऑपरेशन बिग बज' जैसे कार्यक्रमों का संचालन किया गया, जिसमें लाखों मच्छरों को संक्रमित किया गया। यह खुलासा 1977 में पेंटागन की वेबसाइट पर सार्वजनिक किया गया, और इसके बाद सोवियत संघ ने इस पर जांच की।
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