CJI सूर्यकांत ने शिक्षा के असली मकसद पर जोर दिया
सिर्फ डिग्री से नहीं मिलेगी कामयाबी, CJI सूर्यकांत ने बताया शिक्षा का असली मकसद
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भारत के प्रधान न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने भिवानी, हरियाणा में चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में कहा कि छात्रों को केवल डिग्री पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। उन्होंने शिक्षा का असली मकसद चरित्र विकास, जिम्मेदारी और नैतिक मूल्यों को मजबूत करना बताया।
- 01CJI सूर्यकांत ने छात्रों को चरित्र और ज्ञान के महत्व पर जोर दिया।
- 02सिर्फ डिग्री से सफलता नहीं मिलती, अनुशासन और निरंतर सीखने की आवश्यकता है।
- 03शिक्षा का उद्देश्य रोजगार सुनिश्चित करना नहीं, बल्कि नैतिक मूल्यों को मजबूत करना है।
- 04छात्रों को महान हस्तियों से प्रेरणा लेने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
- 05CJI ने स्नातकों से देश के विकास में योगदान देने की अपील की।
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भिवानी, हरियाणा में चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय के पांचवें दीक्षांत समारोह में, प्रधान न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने छात्रों को शिक्षा के असली मकसद पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि भारत का भविष्य आज के छात्रों के हाथों में है और उन्हें मजबूत चरित्र, ज्ञान और जिम्मेदार नागरिक बनने की आवश्यकता है। CJI ने स्पष्ट किया कि केवल अकादमिक डिग्रियां ही सफलता का आधार नहीं हैं; अनुशासन, लगन, समय का सदुपयोग और निरंतर सीखने की इच्छा भी महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने छात्रों से सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने और नैतिक मूल्यों को मजबूत करने पर जोर दिया। महान हस्तियों जैसे स्वामी विवेकानंद और नेल्सन मंडेला से प्रेरणा लेने का सुझाव देते हुए, उन्होंने स्नातकों से अपने गांवों और देश के विकास में योगदान देने की अपील की।
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CJI की सलाह से छात्रों को शिक्षा के प्रति एक नई दृष्टि मिलेगी, जिससे वे अपने व्यक्तिगत और सामाजिक विकास में योगदान कर सकेंगे।
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