बछेंद्री पाल: माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने वाली पहली भारतीय महिला की प्रेरणादायक कहानी
बर्फ में दबीं तो उखड़ने लगी थीं सांसें, फिर छू लिया आसमान! कहानी एवरेस्ट फतह करने वाली पहली भारतीय महिला बछेंद्री पाल की

Image: News 18 Hindi
बछेंद्री पाल, जो 23 मई 1984 को माउंट एवरेस्ट पर चढ़कर भारत का तिरंगा फहराने वाली पहली महिला बनीं, ने अपनी कठिनाइयों से लड़ते हुए यह उपलब्धि हासिल की। उत्तरकाशी, उत्तराखंड में जन्मी बछेंद्री ने पर्वतारोहण में अपने जुनून को अपने बड़े भाई और एक प्रसिद्ध पर्वतारोही से प्रेरणा लेकर विकसित किया।
- 01बछेंद्री पाल ने 23 मई 1984 को माउंट एवरेस्ट की चोटी पर तिरंगा फहराया, जिससे वह यह उपलब्धि हासिल करने वाली पहली भारतीय महिला बनीं।
- 02उन्होंने पर्वतारोहण की प्रेरणा अपने बड़े भाई बचन सिंह पाल और ब्रिगेडियर ज्ञान सिंह से प्राप्त की।
- 03एवरेस्ट पर चढ़ाई के दौरान बछेंद्री को एक भयानक हिमस्खलन का सामना करना पड़ा, जिसमें वह बर्फ के भारी मलबे के नीचे दब गई थीं।
- 04बछेंद्री ने महिलाओं को साहसिक खेलों से जोड़ने के लिए 'भागीरथी सेवन सिस्टर ट्रेनिंग सेंटर' की स्थापना की।
- 05उनकी कहानी न केवल साहस और दृढ़ संकल्प की है, बल्कि यह महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत भी है।
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बछेंद्री पाल, जो उत्तरकाशी, उत्तराखंड में एक साधारण परिवार में जन्मी थीं, ने 23 मई 1984 को माउंट एवरेस्ट की चोटी पर तिरंगा फहराकर भारत की पहली महिला बनने का गौरव हासिल किया। उनका जीवन संघर्ष और साहस से भरा रहा है। बछेंद्री ने अपनी शिक्षा के बाद नौकरी की तलाश में कठिनाइयों का सामना किया, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और पर्वतारोहण की ओर कदम बढ़ाया। उनकी प्रेरणा उनके बड़े भाई बचन सिंह पाल और ब्रिगेडियर ज्ञान सिंह से मिली। एवरेस्ट पर चढ़ाई के दौरान, उन्होंने एक भयानक हिमस्खलन का सामना किया, जिसमें उनकी जान को खतरा हुआ। लेकिन इस कठिनाई ने उनके इरादों को और मजबूत किया। बछेंद्री ने महिलाओं को साहसिक खेलों में आगे बढ़ाने के लिए 'भागीरथी सेवन सिस्टर ट्रेनिंग सेंटर' की स्थापना की, जिससे उन्होंने कई महिलाओं को पर्वतारोहण की ट्रेनिंग दी। उनकी कहानी न केवल साहस का प्रतीक है, बल्कि यह दर्शाती है कि अगर हौसले बुलंद हों, तो कोई भी मंजिल हासिल की जा सकती है।
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बछेंद्री पाल की उपलब्धि ने महिलाओं को साहसिक खेलों में भाग लेने के लिए प्रेरित किया है, जिससे उत्तराखंड में महिलाओं के लिए नए अवसर पैदा हुए हैं।
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