भारत का 275 साल पुराना रंग घर: पूर्व का कोलोसियम
बिना आधुनिक मशीनों के बना था भारत का ये Ancient Colosseum, 275 साल पुराना राज आज भी बना है रहस्य

Image: Zee News
असम के शिवसागर में स्थित रंग घर, जिसे 'कोलोसियम ऑफ द ईस्ट' कहा जाता है, लगभग 275 साल पुराना है। इसे बिना आधुनिक मशीनों के बनाया गया था और यह आज भी अपनी अनोखी निर्माण तकनीक के कारण चर्चा में है। यह ऐतिहासिक स्थल अहोम साम्राज्य की सांस्कृतिक पहचान का अहम हिस्सा है।
- 01रंग घर को 1744 में अहोम राजा स्वर्गदेव प्रमत्त सिंह द्वारा बनवाया गया था।
- 02इसकी निर्माण तकनीक में चिपचिपे चावल का पेस्ट और प्राकृतिक सामग्री का उपयोग किया गया था।
- 03यह एशिया का पहला एम्फीथिएटर है, जहां विभिन्न खेल और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होते थे।
- 04रंग घर की वास्तुकला अष्टकोणीय है और इसकी छत उल्टी अहोम शाही नाव जैसी दिखती है।
- 05रंग घर आज भी असम की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है और यहां भोगाली बिहू जैसे त्योहार मनाए जाते हैं।
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असम के शिवसागर में स्थित रंग घर, जिसे 'कोलोसियम ऑफ द ईस्ट' कहा जाता है, लगभग 275 साल पुराना है। यह एशिया का पहला एम्फीथिएटर माना जाता है, जिसे अहोम साम्राज्य के राजा स्वर्गदेव प्रमत्त सिंह ने 1744 में बनवाया था। रंग घर की खासियत यह है कि इसे बिना आधुनिक सीमेंट और मशीनों के बनाया गया था। इसके निर्माण में 'हीरा-काम' नामक पतली पकी हुई ईंटों का उपयोग किया गया, जिन्हें चिपचिपे चावल के पेस्ट और अन्य प्राकृतिक सामग्री से जोड़ा गया। यह संरचना आज भी मजबूती से खड़ी है और इसे कई प्राकृतिक और मानवीय चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। रंग घर का उपयोग शाही दर्शक दीर्घा के रूप में किया जाता था, जहां अहोम राजा और राजपरिवार विभिन्न खेलों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आनंद लेते थे। इसकी वास्तुकला अष्टकोणीय है और इसकी छत उल्टी अहोम शाही नाव जैसी दिखती है। आज यह स्मारक असम की सांस्कृतिक पहचान का अहम हिस्सा बना हुआ है, जहां भोगाली बिहू जैसे त्योहार मनाए जाते हैं।
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रंग घर असम की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जहां भोगाली बिहू जैसे त्योहार मनाए जाते हैं।
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