आगरा की ऐतिहासिक इमारतों की दिलचस्प कहानियाँ
ताजमहल से बुलंद दरवाजे तक... आगरा की इन इमारतों की खूबसूरती के पीछे छिपी है ये दिलचस्प कहानियां
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आगरा, भारत में कई प्रसिद्ध मुग़ल इमारतें हैं, जिनमें ताजमहल, चीनी का रोजा और अकबर का मकबरा शामिल हैं। ये इमारतें न केवल वास्तुकला की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि इनके पीछे दिलचस्प कहानियाँ भी हैं, जो इन्हें और भी आकर्षक बनाती हैं।
- 01ताजमहल, जिसे शाहजहाँ ने अपनी पत्नी मुमताज़ की याद में बनवाया, 1632 में शुरू हुआ और 1653 में पूरा हुआ।
- 02चीनी का रोजा, जो 1635 में बना, फ़ारसी कवि अल्लामा अफ़ज़ल खान शिराजी की कब्र है।
- 03अकबर का मकबरा, जिसे 1605 में बनाना शुरू किया गया था, लाल बलुआ पत्थरों से बना है।
- 04मरियम का मकबरा, जो जोधा बाई की याद में बनवाया गया, 1623 में शुरू हुआ और 1627 में पूरा हुआ।
- 05फतेहपुर सिकरी का बुलंद दरवाजा, जिसे 1571-73 में बनाया गया, दुनिया का सबसे बड़ा दरवाजा है।
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आगरा, भारत में मुग़ल साम्राज्य के दौरान कई भव्य इमारतों का निर्माण हुआ, जो आज भी पर्यटकों को आकर्षित करती हैं। ताजमहल, जिसे शाहजहाँ ने अपनी पत्नी मुमताज़ की याद में बनवाया, 1632 में निर्माण शुरू हुआ और 1653 में पूरा हुआ। आगरा में स्थित चीनी का रोजा, जो 1635 में बना, फ़ारसी कवि अल्लामा अफ़ज़ल खान शिराजी की कब्र है और इसकी दीवारें नीली चमकदार चीनी टाइल्स से सजाई गई हैं। इसके अलावा, अकबर का मकबरा, जिसे 1605 में बनाना शुरू किया गया, लाल बलुआ पत्थरों से बना है। मरियम का मकबरा, जो जोधा बाई की याद में 1623 में शुरू हुआ, आज एक प्रमुख आकर्षण है। आगरा के पास स्थित फतेहपुर सिकरी में दुनिया का सबसे बड़ा दरवाजा, बुलंद दरवाजा, है, जिसे 1571-73 में बनाया गया। ये सभी इमारतें न केवल उनकी वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध हैं, बल्कि इनमें छिपी कहानियाँ भी इन्हें विशेष बनाती हैं।
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इन ऐतिहासिक इमारतों के संरक्षण से आगरा में पर्यटन को बढ़ावा मिलता है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को लाभ होता है।
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