गुजरात में पारसी महिला का अंतिम संस्कार हिंदू रीति-रिवाज से, उठे सामाजिक सवाल
हिन्दुत्व समझ न आए तो इस घटना को जान लो...पारसी महिला, मुस्लिम से शादी, हिन्दू रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार

Image: News 18 Hindi
गुजरात के नवसारी जिले में एक 55 वर्षीय पारसी महिला का अंतिम संस्कार हिंदू रीति-रिवाज से किया गया, क्योंकि उसे न तो पारसी और न ही मुस्लिम समुदाय से अंतिम संस्कार की अनुमति मिली। यह घटना अंतरधार्मिक विवाह और सामाजिक स्वीकार्यता पर सवाल उठाती है।
- 01महिला ने जीवनभर पारसी धर्म का पालन किया लेकिन मुस्लिम पति से विवाह किया।
- 02महिला का अंतिम संस्कार पारसी रीति-रिवाज से नहीं हो सका, मुस्लिम कब्रिस्तान में भी दफनाने की अनुमति नहीं मिली।
- 03विश्व हिंदू परिषद के नेता सज्जन भरवाड़ ने मानवीय आधार पर अंतिम संस्कार की व्यवस्था की।
- 04महिला के माता-पिता का निधन पहले ही हो चुका था, जिससे परिवार को और कठिनाई का सामना करना पड़ा।
- 05इस घटना ने अंतरधार्मिक विवाह और धार्मिक पहचान के मुद्दों को फिर से चर्चा में ला दिया है।
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गुजरात के नवसारी जिले में एक 55 वर्षीय पारसी महिला का अंतिम संस्कार हिंदू रीति-रिवाज से किया गया। महिला का विवाह एक मुस्लिम व्यक्ति से हुआ था, लेकिन उसने कभी इस्लाम नहीं अपनाया और पारसी धर्म का पालन करती रहीं। जब महिला का निधन हुआ, तो पारसी समुदाय ने अंतिम संस्कार की अनुमति देने से इनकार कर दिया। मुस्लिम कब्रिस्तान में भी दफनाने की अनुमति नहीं मिली। इसके बाद, विश्व हिंदू परिषद के नेता सज्जन भरवाड़ ने मानवीय आधार पर परिवार की मदद की और महिला का अंतिम संस्कार हिंदू रीति-रिवाज से किया। इस घटना ने अंतरधार्मिक विवाह और सामाजिक स्वीकार्यता के मुद्दों को उजागर किया है, जिससे यह सवाल उठता है कि धार्मिक पहचान के कारण लोगों को किस तरह के सामाजिक भेदभाव का सामना करना पड़ता है।
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इस घटना ने अंतरधार्मिक विवाह करने वाले लोगों की सामाजिक स्वीकार्यता पर सवाल उठाया है।
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