झारखंड के गोल्ड मेडलिस्ट हबीबुर शेख का साइकिलिंग सपना महंगी साइकिल के अभाव में अधूरा
महंगी साइकिल नहीं ले पाया स्टेट गोल्ड मेडलिस्ट हबीबुर, परिवार चलाने के लिए रांची की सड़कों पर चला रहा है टोटो

Image: Jagran
झारखंड के पाकुड़ जिले के हबीबुर शेख, जिन्होंने राज्य स्तर पर स्वर्ण पदक जीता, महंगी साइकिल की कमी के कारण साइकिलिंग छोड़कर टोटो चलाने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि यदि उन्हें नई साइकिल मिलती है, तो वह अपनी प्रतिभा साबित कर सकते हैं।
- 01हबीबुर शेख ने 2016 में राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता और राष्ट्रीय स्तर पर 14वां स्थान हासिल किया।
- 02उनकी पुरानी साइकिल के कारण वह प्रतियोगिताओं में पीछे रह गए और नई साइकिल खरीदने के लिए पैसे नहीं हैं।
- 03हबीबुर अब टोटो चलाकर और खेती करके अपने परिवार का खर्चा चला रहे हैं।
- 04उन्होंने कहा कि अगर उन्हें नई साइकिल मिलती है, तो वह अपनी क्षमता साबित कर सकते हैं।
- 05हबीबुर का सपना है कि वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतें, लेकिन संसाधनों की कमी उनके रास्ते में बाधा बन रही है।
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झारखंड के पाकुड़ जिले के रडांगा गांव के निवासी हबीबुर शेख, जिन्होंने राज्य स्तर पर साइकिलिंग में स्वर्ण पदक जीता, अब महंगी साइकिल की कमी के कारण अपने सपनों को छोड़ने पर मजबूर हैं। हबीबुर ने 2012 में साइकिलिंग शुरू की और 2016 में राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता। इसके बाद, उन्होंने 2018 में राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में भाग लिया, जहां वह 14वें स्थान पर रहे। हालांकि, उनकी पुरानी साइकिल ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। अब, परिवार का खर्च चलाने के लिए वह टोटो (ई-रिक्शा) चलाते हैं और खेती भी करते हैं। हबीबुर ने कहा कि उनके पास ₹7 लाख की नई साइकिल खरीदने के लिए पैसे नहीं हैं, लेकिन अगर उन्हें नई साइकिल मिलती है, तो वह अपनी प्रतिभा साबित कर सकते हैं। उनका सपना है कि वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतें, लेकिन संसाधनों की कमी उनके रास्ते में बाधा बन रही है।
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हबीबुर शेख की कहानी झारखंड के खिलाड़ियों के लिए एक प्रेरणा है, जो संसाधनों की कमी के कारण अपने सपनों को पूरा नहीं कर पा रहे हैं।
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