प्रदोष व्रत मई 2026: तिथि, पूजा विधि और महत्व
May Pradosh Vrat: मई में कब है प्रदोष व्रत? जानिए तिथि, पूजा विधि और महत्व
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मई 2026 में प्रदोष व्रत दो बार मनाया जाएगा, पहला 14 मई (गुरुवार) और दूसरा 28 मई (गुरुवार) को। इस व्रत का पालन करने से मनोकामनाएं पूरी होने और सुख-समृद्धि की प्राप्ति का विश्वास है। पूजा का शुभ समय सूर्यास्त से डेढ़ घंटे पहले और बाद का होता है।
- 01प्रदोष व्रत हिंदू धर्म में महत्वपूर्ण माना जाता है।
- 02मई 2026 में दो प्रदोष व्रत होंगे: 14 और 28 मई।
- 03गुरुवार को होने वाले व्रत को गुरु प्रदोष व्रत कहा जाता है।
- 04पूजा का शुभ समय प्रदोष काल में होता है।
- 05इस व्रत से आर्थिक स्थिति में सुधार और मनोकामनाओं की पूर्ति का विश्वास है।
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प्रदोष व्रत हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण व्रत है, जिसे हर महीने कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। मई 2026 में यह व्रत दो बार होगा: पहला 14 मई (गुरुवार) और दूसरा 28 मई (गुरुवार) को। दोनों व्रतों को गुरु प्रदोष व्रत कहा जाएगा, जिससे इनका महत्व और बढ़ जाता है। पूजा का शुभ समय सूर्यास्त से डेढ़ घंटे पहले और बाद का होता है, जिसे प्रदोष काल कहा जाता है। इस दिन भक्तों को शिव जी और माता पार्वती की पूजा करने से सुख-समृद्धि और मनोकामनाओं की पूर्ति का विश्वास होता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, यदि प्रदोष व्रत गुरुवार को होता है, तो यह ज्ञान, संतान सुख और आर्थिक स्थिति को सुधारने में सहायक माना जाता है।
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प्रदोष व्रत को मनाने से भक्तों को मानसिक और आर्थिक स्थिति में सुधार की उम्मीद होती है।
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